राधा के कड़वे प्रश्न – Bhagwan Radha Krishna Story (Heart Touching)

Bhagwan Radha krishna Story

radha krishna story love hindi

भगवान क्रष्ण से द्वारकाधिश

Krishna और Radha स्वर्ग में विचरण कर रहें थे, तभी अचानाक दोंनो एक-दूसरे के सामने आ गए कृष्ण तो विचलित हो गए और राधा प्रसन्नचित हो उठी, कृष्ण सकपकाए और राधा मुस्कुराई.   इससे पहले कि कृष्ण कुछ कहते इतने राधा बोल उठी.  ‘ कैसे हो द्वारकाधीश ??

जो राधा उंन्है, कान्हा कान्हा कह के बुलाया कर ती थी

उसके मुख से द्वारकाधीश का संबोधन कृष्ण को भीतर तक घायल कर गया। फिर भी कृष्ण ने अपने आपको संभालते हुए बोले राधा से, “ मै तो तुम्हारे लिए आज भी वही कान्हा हूँ जो कल था तुम मुझे द्वारकाधीश मत कहो ।

चलो बैठते है, कुछ तुम अपनी सुनाओ और कुछ मै अपनी कहता हूँ । सच कहूँ राधा जब भी तुम्हारी याद आती थी, आंखे आँसुओ से भर आती थी”।

इतने में राधा बोली “मेरे साथ ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ. ना तुम्हारी याद आई. न कोई आंसू बहा। क्यूंकि हम तुम्हैं कभी भुले ही कहाँ थे जो तुम याद आते,

इन आँखों में सदा तुम रहते हो कहीं आँसुओ के साथ निकल न जाओ इसलिए रोते भी नहीं थे। प्रेम के अलग होने पर तुमने क्या खोया जरा आज इसका आईना देखलो।

कुछ कडवे सच और प्रश्न सुन पाओ तो सुनाऊ आपको ?

  • क्या तुमने कभी सोचा की इस तरक्की में तुम कितना पिछड गए,
  • यमुना के मिठे पानी से जिंदगी शुरु की और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुँच गए ?
  • एक ऊंगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्र पर भरोसा कर लिया और दसों ऊंगलिओ पर चलने वाली बांसुरी को भूल गए ?
  • कान्हा जब तुम प्रेम से जुडे थे तो जो ऊंगलि गोवर्धन पर्वत अठाकर लोगों को विनाश से बचाती थी,
  • प्रेम से अलग होने पर उसी ऊंगली ने क्या क्या रंग दिखाया ?

सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी, कान्हा और द्वारकाधीश में क्या फर्क होता है बताऊ ?

अगर तुम कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर जाते, सुदामा तुम्हारे घर नही आते ।

युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता है,

युद्ध में आप मिटाकर जीतते है और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं ।

कान्हा प्रेम में डुबा हुआ आदमी, दुखी तो रह सकता है पर किसी को दूख: नहीं देता।  

आप तो बहुत सी कलाओं के स्वामी हो, स्वप्न दूर द्रष्टा हो,  गीता जैसे ग्रंथ के दाता हो, पर आपने ये कैसे-कैसे निर्णय किया अपनी पूरी सेना कौरवों को सोंप दी, और अपने आपको पांडवों के साथ कर लिया।

सेना तो आपकी प्रजा थी राजा तो पालक होता है, उनका रक्षक होता है। आप जैसे महान ज्ञानी उस रथ को चला रहा था, जिस रथ पर अर्जुन बेठा था । आपकी प्रजा को ही मार रहा था, अपनी प्रजा को मरते देख आपमें करुणा नहीं जगी।

क्यों, क्युंकि आप प्रेम से शुन्य हो चुके थे आज धरती पर जाकर देखो अपनी द्वारकाधिश वाली छवि को ढुंढ्ते रह जाओगे, हर घर, हर मंदिर, में मेरे साथ ही खडे नजर आओगे।

आज भी मै मानती हूँ कि लोग आपकी लिखी हुई गीता के ज्ञान की बातें करते है, उनके महत्व की बात करते है, मगर धरती के लोग युद्ध वाले द्वारकाधीश पर नहीं प्रेम वाले कान्हा पर भरोसा करते है, और गीता मे कहीं मेरा नाम भी नही लेकिन गीता के समापन पर राधे-राधे करते है”

अगर आपको भगवन राधा कृष्णा की यह कहानी अच्छी लगी तो ऐसे Facebook Whatsapp groups पर ज्यादा से ज्यादा Share करे.

Also Read :

One Response

  1. sangam

Leave a Reply

error: Please Share This but dont Copy & Paste.