मोहनदास करमचंद गांधी – Life Story of Mahatma Gandhi Biography

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Life Story Essay of Mahatma Gandhi

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Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi (महात्मा गांधी) के नाम से लोकप्रिय मोहनदास करमचन्द गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था। उनके पिता करमचंद्र गांधी पोरबंदर राज्य के दीवान थे।

बाल्यावस्था में ही महात्मा गांधी का विवाह कस्तुरबा गांधी से संपन्न हुआ था जब महात्मा गांधी 15 वर्ष के थे तब उनकी पहली संतान का जन्म हुआ लेकिन कुछ दिनों में उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के एक वर्ष के भीतर ही गांधीजी के पिता का भी देहांत हो गया था ।

एक औसत विद्याार्थी के तौर पर गांधीजी ने पोंरबंदर से प्राथमिक और राजकेाट से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। 4 सितंबर 1888 को गांधी जी कानून की पढाई करने लंदन चले गये। लंदन में रहने के दौरान गांधीजी ने अपने पहनावे और बोलचाल में विदेशी संस्कृति को ग्रहण कर लिया था, लेकिन खान-पान के मामले में वे शुद्ध शाकाहारी थे।

माता के निधन की सूचना पाकर उन्हें भारत लौटना पडा। सन 1883 में गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका के उपनिवेषक क्षेत्र नटाल स्थित एक भारतीय फर्म दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी में काम करने का एक वर्ष का करार किया।

दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी भारतीयों के साथ होते भेदभाव के शिकार भी हुए उन्हें ट्रेन का First Class का टिकट होने के बावजुद third class में यात्रा करने को कहा गया। और ऐसा न करने पर उन्हे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया। दक्षिण अफ्रिका में रहते हुए गांधीजी ने रंगभेद की नीति के खिलाफ कईं आंदोलन किये।

सन 1915 में भारत लौटने के बाद गांधीजी प्रतिष्ठित कांग्रसी नेता गोपालकृष्ण गोखले के संपर्क में आये। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में आम जनता के हितों को लेकर अपनी आवाज उठाते थे। सन 1917 और सन 1918 में गांधजी ने खाद्य वस्तुओं की अपेक्षा, नील और गैर खाद्य वस्तुओं के खेती के विरोध में चंपारण और खेडा सत्याग्रह किया। 

उसके बाद गांधीजी ने अपने अनुयायीयों समेत देश भर के लोगेां को एकत्र कर अहिंसा पर बल देते हुए असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय नागरिकों को विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और स्वदेशी चीजों को अपनाने पर जोर दिया।

देश भर में गांधाजी की लोकप्रियता चरम पर पहुंच चुकी थी, सन 1930 में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा बनाये गये नमक कानून को तोडने के लिए एतिहासिक दांडी मार्च किया।

जब कांग्रेस अंग्रजी सरकार को भारत छोडने के लिए विवश कर रही थी तब मुसलमानों ने अपने लिए एक अलग राष्ट्र की मांग रख दी। 14 अगस्त 1947 की रात्री को पाकिस्तान का निर्माण हुआ और 15 अगस्त भारतीय स्वाधीनता की घोषणा हुई।

आजादी के एक वर्ष के भीतर ही 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे नामक एक हिन्दूराष्ट्रवादी ने गोली मारकर गांधीजी की हत्या कर दी। जन-मानस को अहिंसा का रास्ता दिखाने वाले गांधीजी एक अच्छे लेखक भी थे।

कई दशकों तक गांधीजी हरिजन नामक समाचार पत्र का गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी भाषा में संपादन करते रहे। अपनी आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग के अलावा गांधीजी ने कईं किताबें लिखी है।

सत्याग्रह, अहिंसा, और सादगी को ही एक सफल मनुष्य जीवन का मूल मंत्र मानने वाले गांधीजी के इन्हीं आदर्शों से प्रभावित होने के बाद रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हे महात्मा अर्थात महान आत्मा का दर्जा दिया था। गांधीजी ने अपना जीवन सत्य की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया था।

इस समय गांधी जी को बहुत भला बुरा कहा जाता हैं, लेकिन गांधी जी ऐसे थे नहीं, हमारे देश के आजाद होने के बाद कांग्रेस ने गांधी जी का बहुत दुरुपयोग किया, आज जो कुछ भी हो रहा हैं कांग्रेसी सरकार की वजह से हो रहा हैं, खुद गांधीजी ने देश की आजादी के बाद कहा था, की अब देश आजाद हो चूका हैं अब हमें कांग्रेस पार्टी को अब ख़त्म कर देना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आज हम इसका परिणाम भुगत रहे हैं | अगर आपको यह लेख अच्छा लगें तो शेयर और कमेंट्स जरूर दें |

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