जहाँ चाह वहाँ राह, Power of Positive Thinking – Mahatma Gandhi Stories

The Power of Positive thinking Hindi

Think Positive

Positivity of Gandhi-Ji

1944 में कुछ दिन के लिए गांधीजी सेवा आश्रम से वद्र्धा आकर रहें, उनका किसी भी चीज के प्रति कोई विशेष मोह या लगाव नहीं था | वे कहीं भी किसी भी चीज के बिना रह सकते थे |

लेकिन प्रार्थना के बिना नहीं। सुबह सूर्योदय की प्रार्थना का समय सुबह 4:30 बजे था। सब लोग प्रार्थना भूमि में आ बैठे थे, वल्लभ स्वामी अभी नहीं आये थे उन्हें 5-6 मील से आना था और आज गीता पाठ करना था।

गांधीजी भी ठीक समय पर अपनी जगह आकर बैठ गये तो सबमें चंचलता हुई कि वल्लभ स्वामी नहीं आयें और अविशवास आ उभरा कि वे अब नहींआयेंगे।

एक कंठ से यह विश्वाश फूटा वे अब क्या आयेंगे ? हम प्रार्थना शुरू कर दें। अब क्या आयेंगें दो मिनट ही तो है। यह उत्तर गुन-गुनाहट में जागा कि गांधीजी का अविशवास समाधान में उभरा अभी तो तीन मिनट बाकी हैं आयेगा क्यो नहीं ?

भाषा के संकेत कितने प्यारे और मिठे होते है। अविशवास की भाषा हैं दो तीन मिनट ही तो हैं और विश्वाश की भाषा हैं अभी तो दो तीन मिनट खेर आधा मिनट शेष था कि वल्लभ स्वामी आ पहुंचे।

गांधीजी ने सबकी ओर ताड कर देखा तुम लोग अविशवास की डोर इतनी जल्दी क्यों छोड देते हो, वहीं बात कि असफलता को इतनी जल्दी क्यों स्वीकार कर लेते हो। सचमुच जीवन में हार की असफलता की शंका से जय की सफलता की संभावना अधिक सच्ची और अधिक वास्तविक है।

Mahatma Gandhi Positive Thinking Stories in Hindi

खबर अच्छी हैं पर कौन सी ?

एक धनी आदमी था, दीन दूखीयों की सहायता भी करता था। एक बार एक महिला उसके पास आयी, बाल बिखरे हुए थे आंखे रो-रो कर सुज गयी थी।

कहने लगी कि उसके चार साल के बच्चे को एक गंभीर बीमारी हो गयी हैं, बीमारी का इलाज बहुत मंहगा हैं यह सुन धनी का दिल पसीज गया। उसने अपने सचिव से कह कर महिला को पचास हजार रुपये दिलवा दिये।

सचिव ने कहा कि महिला दोखेबाज भी हो सकती हैं पर वह नहीं माना। चार दिन बाद सचिव भागता हुआ आया उसकी आंखे लाल थी और आवाज गुस्से से कांप रही थी उसने बताया कि वह महिला ठग थी।

उसको कोई बच्चा बीमार नहीं हैं, उसे पुलिस ने गिरफतार कर रकम बरामद कर ली है।

धनी न कहा तुमने अच्छी, खबर सुनायी पर अच्छी खबर यह नही हैं कि मेरे पैसे बच गये। अच्छी बात यह हैं कि कोई ऐसा बच्चा नहीं है जो गंभीर रोग से पीढित हैै। यह मेरे लिए राहत की बात है। सच हैं सकारात्मक रवैया रखने वाला व्यक्ति हर हाल में शांत चित्त और खुश रहता है।

Negative Thinking Example

एक राजा के खांचांजी ने उसे बताया कि राज्य की धनराषी भरपूर हैं इतना धन हैं कि दस पीढी आराम से खायेगी। राजा चिंता में पड गया दस खायेंगी पर ग्यारहवी का क्या होगा ?

Positive Thinking Example

राजा प्रथ्वी वल्लभ को दुष्मनों ने बंदी बना कैद खाने में डाल दिया। पर जब उसे खाना देने आये तो उसे आवाज लगाई राजा प्रथ्वीवल्लभ खाना खा लों। राजा ने सोचा शोक किस बात का, मैं तो केद,खाने में भी राजा ही हूं

Make Your Vision Positive

सकारात्मक नजरिया विकसित करें | जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व निखरता हैं | इसलिए सकारात्मक जीवन के लिए सकारात्मक नजरिया होना बहुत जरुरी हैं | अभी तक हम जो जीवन जीते आएं है, उसमें हमने सिर्फ negative/नकारात्मक बातों पर ही ध्यान दिया हैं |

जबकि हमने उसके दूसरे छोर सकारात्मक पर नजर ही नहीं डाली और यही कारण हैं की आज हमारी जिंदगी नकारात्मक बन कर रह गयी | दोस्तों जब से मैंने ‘सकरात्मक सोच रखने’ के benefits के बारे में पड़ा है मुझे इससे काफी सफलता मिली हैं |

इसलिए में आपसे भी कहना चाहूंगा की, अपने जीवन में हमेशा सकारात्मक नजरिये से जियें |

Aap jesa Sochate Hai Vaise Hi Ban Jate Hain

जहां चाह वहां राह , जीवन की सारी उपब्धियों का स्त्रोत एक चाह ही होती है। जिसका कामना अथवा इच्छा को आप दिन-रात अपने संग रखेंगे उससे अनुप्राणित रहेंगे वह धीरे-धीरे आपके व्यक्तित्व का अंग बन जायेंगी।

चाह में बडी आकर्षण शक्ति ‘attraction power’  होती है। जब चाह चरम सीमा पर पहूंच जाती है तो इस आकर्षण ‘attraction’ के छोर से बंधी हुई प्रत्येक वस्तु आपकी और खिंची चली आती है अनमने होकर काम करने से दाल-रोटी तो चल सकती है परन्तु समृद्धि प्राप्त नहीं की जा सकती ।

युवकों को केवल एक ही मूल मंत्र देना चाहता हूं अपने आप पर विष्वास रखो, अपनी शक्तियों पर भरोसा रखो। यह बात स्मरण रखों कि तुम्हारें भीतर वह शक्ति है जो एक बार जागृत होने पर तुम्हें न केवल इमानदार उद्यमी वरण सफल व सुसस्क्रत भी बना देगी।

 Talk to Yourself

आपके चारों ओंर आनन्द और मनोरंजन के अनेक साधन विद्यमान है। बुद्धिमान व्यक्ति प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक स्थान पर आनन्द खोज लेते है। आप प्रातः काल सो कर उठे तो उस समय कसकर दृढ निष्चय करें कि चाहे कुछ भी हो आज के दिन को आनन्द और उल्लास का दिन बनाकर ही रहेंगें। इसका परिणाम यह होगा कि संभावित असफलता और संकट आपके पास नहीं आयेंगे।

आपका दिन व्यर्थ नष्ट नहीं होगा। आप जितना काम कर पाते उससे दो गुना काम आवष्य कर डालेंगे। यदि मन खिन्न हो जाये तो प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए खुब हँसें और मुस्करायें। जोर-जोर से खिलखिला कर हंसने का प्रयत्न किजिए।

कष्टों की सदा अपेक्षा कीजिए। उनका मजाक उडाईयें, जब हम उनकी अपेक्षा करते हैं उन्हें भूला देते हैं तब वह विचार हमारे लिए दुखदायी नहीं रहते। विपत्तियों में अपने मन को सुधारकर उनका मुकाबला करने के षक्ति पैदा करना एक उत्तम गुण है।

अतः अपने मन को वष में रखने की शक्ति प्राप्त कीजिए ताकि हीन चित्तवृत्तियाँ आपको न डिगा सके। कितनी भी कठिनाईंया हो अपने विचारों पर दृढ रहिए। आपकी विजय पताका फहरायेगी और आप अपने उद्देष्य में सफल होंगे। मनुष्य जिस बात का चिंतन और मनन करता है और जिन उद्देष्यों की पूर्ति का संकल्प करता है, उनमें उसे मानसिक निष्चय द्वारा ही सफलता प्राप्त होती है।

संकल्प का ही दूसरा नाम सफलता है, और व्यक्ति का मन संकल्पों का स्त्रोत है। अतः मन में किसी प्रकार की कमजोरी न आने दें। उसमें जंग न लगने दे। यदि मन प्रफुल्लित रहेगा तो निर्बल शरीर भी कठिन से कठिन कार्य करने में समर्थ हो सकता है – By Swett Mardern.

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