गंगा नदी क्यों ?- Why Ganga River Water is Pure & History

जानिये आखिर क्यों गंगा नदी भारत की पवित्र नदियों में गिनी जाती हैं, गंगा के पानी में क्या हैं ऐसा जो की उसे इतना शुद्ध बनती हैं. पढ़िए गंगा का पानी शुद्ध क्यों होता हैं why ganga river water is pure.

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Why Ganga River Water is Pure in Hindi

गंगा भारत की सबसे प्रसिद्ध नदी हैं. यह हिमालय पर्वत से निकलकर बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं. क्या आप जानते हैं की गंगा को पवित्र नदी क्यों माना जाता हैं ? गंगा को पवित्र नदी माने जाने के दो कारन हैं – एक तो इसका पानी बोतलों में रखने पर बहुत दिनों तक ख़राब नहीं होता.

इसमें कुछ ऐसे खनिज पदार्थ मिले हुए हैं, जो पानी को सड़ने नहीं देते. इसे आधार पर लोगों ने गण को पवित्र नदी मन्ना शुरू कर दिया. दूसरा कारण एक प्रचलित लोक कथा भी है, जिसके कारन गंगा की महिमा और भी अधिक बढ़ गई. इस लोक कथा के हिसाब से गंगा स्वर्ग में बहा करती थी.

सगर नाम के राजा के 60 हजार पुत्र थे, जो किसी ऋषि के शाप से मर गए थे, उनके उद्धार के लिए गंगा को भगीरथ स्वर्ग से धरती पर लाए थे. तभी से इस उद्धार करने वाली माना जाने लगा.

इसकी लम्बाई 2506 किमी हैं, लम्बाई में एशिया की नदियों में इसका 15 वा स्थान हैं और संसार में 39 वा. हिमालय से निकलकर यह ऋषिकेश में आती हैं और वहां से हरिद्वार के मैदान में आ जाती हैं.

जहां गंगा को पवित्रता के नाम से जाना जाता था आज वही इस नदी को प्रदुषण से भरी नदी के नाम से भी जाना जाता हैं. बदलते दौर में ऐसी पवित्र नदी भी प्रदुषण युक्त हो गई हैं. इसका कारण है मानव. सच कहे तो जितना नुकसान मानव ने प्रकृति को पहुँचाया हैं उतना जानवरों ने भी नहीं पहुँचाया होगा.

गंगा नदी का पानी शुद्ध क्यों होता हैं – Story Of Ganga River

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एक वो समय था जब इस धरती पर मानव से ज्यादा जनवरी की जनसंख्या थी, और उस समय प्रकृति भी उतनी ही सुनहरी, शुद्ध थी. हरे भरे जंगल थे सब कुछ मनमोहक था. लेकिन जब से मानव की जनसख्या बड़ी हैं तब से यह जंगल, यह प्राकृतिक सौंदर्य आदि सब कुछ गायब हो गया हैं.

बड़ी शर्म की बात हैं की हम मानव हो कर यानी एक समझदार प्राणी हो कर, ऐसा प्राणी हो कर जो की देवताओ को भी धरती पर जन्म लेने पर मजबूत कर देता हैं. ऐसा मानव जो खुद ईश्वर हो सकता हैं. आज वही मानव इतना गिर गया हैं.

दोस्तों आपसे मेरी गुजारिश हैं की कम से कम आप तो प्राकृतिक को नुकसान न पहुंचाए और जहां तक हो सके दूसरों को भी नुकसान पहुँचाने से रोके. जिस मां प्रकृति ने हमे जन्म दिया हैं क्या हमे उसके साथ ऐसा बर्ताव करना चाहिए. नहीं न बल्कि हम सब को अपने जीवन में 10 पीपल के पेड़ लगाने व उन्हें बड़ा करने की जिम्मेदारी लेना चाहिए.

ताकि हम अपने जीवन में जितनी स्वांस लेते हैं उसका किराया चूका सके. दोस्त आप भी अपने घर के नजदीक यह कही मंदिर, खुली जगह, स्कूल आदि जहां भी हो सके पीपल के पेड़ लगाए.

  • नाम – सूरज गुप्ता
  • पता – मोहाली

HindiMind – आप भी हमे ऐसी जानकारी लिख कर भेज सकते हैं, विषय चाहे कोई सा भी हो लेकिन बात पते की होना चाहिए.

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  1. Arman

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