इन 8 बातों को जीवन में हमेशा याद रखो – Spiritual Article

Spiritual Message by Sadguru

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जीवन में सदा याद रखो:-

1. समय को व्यर्थ मे नष्ट न करो। समय को नष्ट करना यानि जीवन को नष्ट करना है क्योंकि जीवन समय से बंधा हुआ है। समय ही जीवन है। आत्मा है, मृत्यु के बाद एक श्वास को किसी भी कीमत पर फिर से नहीं लिया जा सकता। इसी से मनुष्य के जीवन समय का मूल्य स्वयं सिद्ध होता है।

2. यदि संसार में जीना हैं तो अजनबी बनकर जीओं। यही जीवन जीने की सर्वात्तम कला है। दुनिया में अपनापन लेकर जीना समस्त चिंताओं और दुखोे का कारण है। संसार में अणु मात्र भी अपना नही है। जिससे संयागे हुआ हैं उससे वियोग पक्का हैं। यही संसार का नियम है।

3. जो अन्याय को अनिती पूर्वक दूसरो का शोषण करते हैं, या अधिक संग्रह करते है। वे मृत्यु के पूर्व और मृत्यु के बाद हर समय दूखी रहते है। क्योंकि संग्रह किया हुआ सामान यही रह जाता है। और शोषण व संग्रह में किये हुए पाप उनके साथ जाते हैं। पाप कर्माें का फल ही दुख है। जो सत्य है।

4. संतान को अपार संपति नही उत्तम संस्कार देना चाहिए। संस्कारहिन रावण, कंस, दूर्योधन ने राज्य परिवार सहित स्वंय का नाष करवाया और उत्तम संस्कार वाले ध्रुव भक्त प्रहलाद ने संसार मे सर्वोत्तम पद पाया। उत्तम संस्कार ही संसार में सर्वश्रेष्ठ और सपूर्ण सपंत्ति है। जो सत्य है।

5. सो वर्षां के भोग विलास पूर्ण जीवन से एक दिन का त्याग का जीवन श्रेष्ठ है। सो वर्षों के पापमय जीवन से एक दिन का पूण्य का जीवन श्रेष्ठ है। सो पापी पुत्रों से एक पुण्यात्मा पुत्र श्रेष्ठ है। पाप की कमाई के लाखों के दान से न्यायनीति की कमाई, का एक रुपया का दान भी श्रेष्ठ है।

6. हमारी दशा कसाई के घर के उन बकरों की तरह हैं जो कितना भी हरा-भरा खाये एक दिन उसी कसाई के हाथो कट जाते है। इसी तरह हम संसार में कितना ही भागे विलास का जीवन जीयें एक दिन कालरूपी कसाई के हाथो मरना ही पडता है। कसाई के घर का बकरा देख रहा है कि कसाई ने एक-एक कर सभी बकरो को मार दिया है।

अब मेरा भी नंबर है। इसी तरह संसार में कालरूपी कसाई एक-एक कर सबको मार रहा है। अब मेरा भी नंबर है। ससार मे मौत और ईष्वर आत्मा को कभी न भूलों क्योकि मृत्यु की स्मृति कुकर्माें से हटाती है। और ईष्वर जन्म-मरण से मुक्त कर देता है।

7. बहुत कुछ पाकर भी कुछ नही पाया। जो खुदा से बेखबर है। कुछ नही पाकर भी सबकुछ पाया जिसकी खुदा पर नजर है।

8. हवा का झरोखा तूफान नही होता है। मंदिर का हर पत्थर भगवान नही होता है। इुनिया में हर इंसान इंसान नही होता है। जिसमे हो इंसानियत वही इंसान होता है। 

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