हज की यात्रा और पानी का जहाज | Life in Gods Hand

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एक सुफी फकीर हज की यात्रा पर जा रहा था | जहाज पर हजारों यात्री सवार थे दुसरे ही दिन भयंकर तुफान आया प्राण कोप गये जहाज के, बडा शोरगुल उत्पात मच गया त्राही हाहाकार लगता था |

अब गये तब गये बचेंगे नहीं समुद्र बिलकुल विक्षिप्त मालूम होता था ऐसी उतुंग तरंगे उठ रही थी कि जहाज को ही डूबो देगी जहाज छोटा मालूम पडने लगा जैसे छोटी सी नांव हो तरेंगे इतनी भयंकर थी |

कैप्टन चिल्ला रहा है लाउडस्पीकर पर आज्ञा दे रहा है जीवन को बचाने के लिए नांव उतारी जा रही है मल्लाह सजग हो गये है सब कोंप रहे हैं। स्त्रियां रो रही है चिल्ला रही है बच्चे चिख रहे हैं कुत्ते भौंख रहे हैं भागदौड मची है एकदम पागलपन है मौत की घडी है।

सिर्फ वह एक सुफी फकीर जगह-जगह खडा होकर बडे मजे से देख रहा हैं। न केवल देख रहा है बल्कि बडा प्रसन्न भी हो रहा है। जैसे कि भीतरी आनन्द हो ।

एक बुढा आदमी उसे देखते देखते क्रोध से भर गया उसने कहा सुनो जी होंष में हो इधर कितने लोगो की जान जा रही है तुम कोई नाटक देख रहे हो तुम्हारी अकल में आ रहा है कि क्या हो रहा है उस सुफी फकीर ने कहा महानुभाव आप इतने उत्तेजित क्यो हो रहे है क्या जहाज आपके बाप का है। डूब रहा है डूब रहा है ।

यह एक ऐसी भाव दषा है जब डूबे तो उसका न डूबे तो उसका। बचे तो उसका न बचे तो उसका। और आदमी अपने को बीच से हटा लेता है तब कोई तुम्हें दुख नहीं दे सकता और कोई सुख तुम्हें विक्षिप्त नहीं कर सकता। तब तुम्हारं जीवन में एक परम शांति की दशा निर्मित हो जाती है तब एक रसधारा बहने लगती है जिसे हम आनन्द कहते हैं। Osho

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