आप भी जानिए ब्राह्मण लहसुन प्याज क्यों नहीं खाते हैं – Why ??

पहली बार यह सुनकर आप भी हैरान तो हुए होंगे, की क्यों कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते, जैसे जैन धर्म में यह वर्जित हैं, ब्राह्मण समाज में यह वर्जित हैं आदि. प्याज और लहसुन को वर्जित करने के पीछे बहुत ही बड़ा कारण हैं. Scientific reason why onion and garlic is not eaten and why brahmins don’t eat’s theme read the story in hindi.

छोटे रूप में बताया जाए तो इनके सेवन से व्यक्ति की कामवासना प्रभावित होती हैं. लहुसन और प्याज खाने वाला मानव कम जानवर ज्यादा बन जाता हैं. उसमे वासनाओं की लहर ज्यादा उठने लगती हैं. यही वजह रही थी की प्राचीन समय में संत और अन्य पूजनीय समाज ने इनका सेवन बंद कर दिया था.

लेकिन आज हर एक व्यक्ति चाहे वह किसी भी समाज का हो, लहसुन और प्याज जरूर खाता हैं. तो इसका परिणाम भी आपके ही सामने हैं. रोजाना नई-नई बलात्कार की खबर सुनने को मिलती हैं आदि कई दुष्कर्म होते जा रहे हैं.

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(लहसुन प्याज क्यों नहीं खाना चाहिए) हमारे धार्मिक अनुष्ठानों व्रत और ब्राह्मणों के घरों में प्याज और लहसुन का प्रयोग त्याज्य माना गया हैं, क्योंकि ब्राह्मण सभी वर्ग जातियों का पूज्य माना गया हैं. उनके घरों में इसका प्रयोग क्षत प्रतिशत वर्जित कर दिया गया था, ताकि उसके खाने से उस पूजनीय प्राणी में कोई विषय-विकार उत्पन्न न हो, जिसका परिणाम आगे चलकर उसके कूल और जाती को कलंकित कर दें.

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ऐसी दूरदर्शिता को देख कर ब्राह्मण के लिए तो खासकर और सभी के लिए प्याज और लहसुन खाना वर्जित कर दिया गया. प्याज और लहसुन के सेवन से विषयवासना में वृद्धि होती हैं और कुछ समय बाद वीर्य की सघनता कम हो कर गतिमानता बढ़ जाती हैं. परिणाम भयंकर हो सकता हैं.

क्योंकि ब्राह्मण एक पूजनीय समाज हैं, और अगर वही ब्रष्ट हो जाये तो. इसी बात को नजर में रखते हुए प्राचीन समय में ब्राह्मण व अन्य जातीय प्याज लहसुन का उपयोग नहीं किया करती थी. लेकिन आज के समय में इस बात को कोई नहीं मानता.

आज के समय में लगभग हर एक ब्राह्मण समाज का व्यक्ति लहसुन और प्याज का सेवन कर रहा हैं, इसका परिणाम आपके सामने हैं. ज्यादातर ब्राह्मण भ्रष्ट हो चुके हैं, अपने रास्तों से भटक चुके हैं. वह पंडिताई भी बुरी नियत से करते हैं आदि.

ऐसे बहुत से उदाहरण भी हैं – जैसे आसाराम बापू. यह ब्राह्मण नहीं थे, लेकिन इनका कार्य ब्राह्मण जैसा ही था. वह पूजनीय थे लेकिन फिर भी वह भ्रष्ट हुए, आखिर क्यों ?? क्योंकि उन्होंने भी प्राचीन ग्रन्थ की बातों पर ध्यान नहीं दिया. एक शुद्ध पवित्र ब्राह्मण के लिए सादा भोजन ही काफी होता हैं. क्योंकि सदहर भोजन शरीर को किसी भी विकार से प्रभावित नहीं करता.

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जो पूज्य ब्राह्मण लोगों को वेद-शास्त्र सूना रहा हो, और उसके मुंह से दुर्गन्ध आये, यह विचारणीय हैं हम और दूसरे क्या सोचेंगे ? यह भी इसके वर्जित होने का कारण था. इसीलिए ब्राह्मणो को प्याज व लहसुन खाना मना था.

फिर भी लहसुन और प्याज के कुछ गुणों के कारण इनका प्रयोग आयुर्वेदा में किया जाने लगा, ताकि लोगों के स्वास्थ्य को ठीक रखा जा सके. जैसे कई दवाइयों में में सखियां जहर भी होता हैं. उसका किसी हद तक प्रयोग स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक होता हैं, ठीक इसी प्रकार आयुर्वेद में किसी हद तक प्याज और लहसुन के सेवन की छूट दी गई हैं.

विज्ञानं कहता हैं की प्याज के एक छिलके में इतनी ऊर्जा शक्ति होती हैं की यदि उसका उपयोग वैज्ञानिक ढंग से किया जाए, तो वह एक छिलका एक बड़े लोहे के बायलर को विस्फोट द्वारा नष्ट कर सकता हैं.

2 Comments

  1. sagar
  2. lana

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