शादी एक दुःख का कारण है – जानिये क्यों (शादी प्रकृति के खिलाफ है)

शादी के बाद जीवन में फूल क्यों नहीं खिलता, क्यों लोग शादी के बाद और ज्यादा दुखी हो जाते है, क्यों शादी के पहले जो स्त्री उन्हें परी और चांद लगती है वही उनके जिंदगी में दुःख का कारण बन जाती है ?

शादी, विवाह जो की एक अप्राकृतिक रिश्ता है, यह इंसानो द्वारा प्रकृति के खिलाफ बनाई एक व्यवस्था है, और इंसान ने जब-जब भी प्रकृति को पीछे छोड़ने या उसके नियमो को लांघने की कोशिश की है तब-तब उसने नुकसान, दुःख, विषाद ही पाया है.

हां प्रकृति ने स्त्री पुरुष, आदमी औरत बनाये है लेकिन उसने शादी जैसा कुछ नहीं बनाया. जानवरो की कभी शादी नहीं होती, वह कितने खुश दीखते है. कम से कम इंसानो की तरह दुखी तो नहीं दीखते न.

बात सिर्फ इतनी सी है की शादी जो है वह अप्राकृतिक है, प्रकृति ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई थी यह इंसानो ने बनाई है. और जो भी चीज इंसान ने बनाई है उसमे दो दिन की चांदनी और फिर अंधेरी रात होती है.

शादी एक तरह की कैद है, व्यक्ति सिर्फ एक ही स्त्री पर आकर बंध जाता है. एक उदहारण दूंगा : मानलो की आपकी भूख 8 रोटी खाने की है और आपको सिर्फ 2 ही रोटी दी जाए तो क्या आप संतुष्ट हो जायेंगे. हां आप संतुष्ट हो सकते है अगर आपको आपके रूह से जुडी कोई 1 रोटी भी मिल जाए तो वह आपकी सारी भूख को तृप्त कर सकती है, लेकिन ऐसा होना बहुत-बहुत मुश्किल होता है, लेकिन जब भी ऐसा होता है तब हम उन्हें रोमियो-जूलिएट, राधा और कृष्णा आदि जैसे नाम दे देते है.

जिन्होंने शादी की व्यवस्था बनाई थी वह किसी और ही उद्देश्य से बनाई गई थी लेकिन आज वह सब न जाने कहां खो गया. और हम यूंही भेड़चाल चले जा रहे है.

अगर किसी से पूछा भी जाए की शादी क्यों की जाती है, तो जवाब में आप पाएंगे
“वंशवृद्धि के लिए” लेकिन क्या घटिया जवाब है, भाई वंशवर्द्धि तो जानवर भी हमसे अच्छे से कर लेते है फिर उसके लिए शादी की क्या जरूरत.

:में इंसानो द्वारा बनाये गई शादी जैसी व्यवस्था का अनादर नहीं कर रहा, (जहां तक मेरी नजर है वहां तक मुझे इंसानो द्वारा बनाई गई शादी जैसी व्यवस्था के पीछे एक आध्यात्मिक, गहरा अर्थ नजर आता है)

में खिलाफ इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आज के लोगों से अगर पूछा जाए तो वह कहेंगे की शादी परिवार को बढ़ाने के लिए, वंश बढ़ाने के लिए, पारिवारिक सुख भोगने के लिए आदि इन कारणों से की जाती है. लेकिन इसमें मुझे कोई आध्यात्मिकता या कोई गहरापन नजर नहीं आता, जो इनके यह जवाब है यह तो जानवरो से मिलते जुलते है.

आज के रिवाजो को देखते हुए मेरी नजर में शादी एक समझौता है. दुःख होता है यह जानकर की आज की शादियां लड़के को न देखकर उसके घर परिवार और जमीं जायदाद को देख कर की जाती है. हां यह आपकी नजर में सही है, लेकिन यह पूरी तरह से गलत है. जो आप देख रहे है वह तो वैसे भी एक दिन छूट ही जायेगा फिर आपको इस जीवन से क्या मिला, व्यक्ति सिर्फ इस जीवन से अनुभव भर के ले जाता. और इंसान को अनुभव संघर्ष में ही हासिल होते है फिर क्यों जमीन जायदाद आदि देखि जाए. क्यों न यह बात लड़के और लड़की पर ही छोड़ दी जाए. हां मां-बाप होने के नाते आप उन्हें सही गलत की सलाह दे सकते है लेकिन उनके जीवन का निर्णय लेने का आपको कोई अधिकार नहीं.

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