काली चिडियां का गंजापन इंसानों की तरह उनकी शर्मिंदगी का नहीं उनके गौरव का प्रतिक है।

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काली चिडियां – Moral Story Of Birds

ghamand par kahani

काली चिडियां

मनुष्य हो या पशु -पक्षी प्रतिस्पर्धा सभी में होती है। एक बार जंगल में पशु -पक्षीयों की भरी सभा में black bird और hawk ने ऊंचा उडने की शर्त लगाई।

बाज बोला मुझे सभी पक्षीयों का राजा इसलिए ही कहते हैं क्योंकि मैं सबसे ऊंचा उड सकता हूं। काली चिडियां को बाज की अहंकार भरी बातें सहन न हुई। वह बोली- मैं उडकर दिखाउंगी तुझसे उंचा।

आखिर दोनों में शर्त लग गई और तय हुआ कि दोनों सिर पर कोई चीज उठाकर उंचा उडें। बाज बहुत चालाक था उसने सिर पर रूई का फोहा रखा क्योंकि रूई देखने में ज्यादा लेकिन वजन में हल्की होती है। लेकिन चिडियां ने सिर पर नमक की डली रखी।

क्योंकि नमक की डली देखने में छोटी थी। उस भोली चिडियां को क्या पता था कि नमक की डली छोटी होने पर भी रूई से कईं अधिक भारी है।

दोनों ने उडना शुरू किया। बाज काली चिडियां से काफी उंचा निकल गया। सबको निश्चय हो गया कि कुछ ही देर में काली चिडिया हार मान लेगी और विजय की माला बाज के गले की शोभा बडायेगी। दोनों उंचे उडते-उडते बादलों में पहूंच गये।

सहसा बाज ने पलटा खाया बादल की बूंदो में रूई भीगने लगी और बाज का सिर भारी होने लगा, जबकि नमक धुलकर बहने लगा और काली चिडियां का सिर हल्का होने लगा।

दोनों उडते गये उचें और उंचे और फिर और भी उंचे। सिर का बोझ हल्का होने से काली चिडियां के पंखों में मानों नयी ताकत आ गयी। अब तो काली चिडियां ने पंख और जोर जोर से फडफडायें और वह उंचे उडकर बाज के बाराबर आ गयी।

नीचे पशु-पक्षीयों ने देखा कि दोनों एक-दूसरे के बराबर उड रहें है तो वे तालीयां बजाने लगे। उनकी तालियों की गडगडाहट और किलकारीयों से सारा जंगल और आकाश गूंज उठा।

दोनो और भी तेजी से पंख फडफडाने लगे और एक-दूसरे से आगे निकलने की जी तोड कोशिश करने लगे। परन्तु काली चिडियां ने बाज को नीचे छोड दिया वह उडती गई, उडती गइ…….- बाज से उंचे और फिर और भी उंचे।

आखिर बाज ने हार मान ली । और दोनों पक्षी नीचे धरती पर उतर आयें, जहां काली चिडियां का तालीयों , किलकारियों और जिंदाबाद के नारों से जोरदार स्वागत किया गया।और उसके गले में विजय का हार पहनाया गया।

परन्तु नमक के पानी के प्रभाव से काली चिडियां के सीर पर बाल झडने शुरू हो गये। यहां तक कि अंत में काली चिडियां का सिर बिलकुल गंजा हो गया। तब से आज तक काली चिडियां के वंष में सभी गंजे होते है। यह गंजापन इंसानों की तरह शर्मिंदगी का नहीं उनके गौरव(pride) का प्रतिक है।

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