महेंद्र सिंह धोनी के किस्से – MS Dhoni Life Story Biography जरूर पड़े

Captain Mahendra Singh Dhoni Biography in Hindi

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Indian cricketer M.S Dhoni का पूरा नाम  हैं – “Mahendra singh dhoni” | उनका जन्म 7 जुलाई 1981 को Ranchi, Jharkhand में हुआ था | उनकी शुरूआती शिक्षा श्यामली के D.A.V Jawahar vidhya mandir में हुई |

बचपन से ही उनमे खेलों के प्रति गहरा लगाव था लेकिन पहले-पहल उनकी ख़ास रूचि badminton और football की और थी वे इन खेलों के लिए Club और State Level भी खेले | Dhoni अपनी Football Team के Goal keeper थे उनके Football coach ने ही उन्हें एक पास के Cricket club के लिए cricket खेलने भेजा |

हालाँकि इससे पहले Dhoni ने कभी भी Cricket नहीं खेला था पर उनके पास wicket keeping का हुनर था | वे 1995 से 1998 तक Commando Cricket Club से जुड़े रहे | अपने प्रदर्शन के बल पर वह Under-16  cricket team में चुने गए |

उन्हें सभी प्यार से “माही” कहकर बुलाते हैं | Dhoni ने 1999-2000 में First class cricket खेलना शुरू किया | Kenya Team और घरेलु Matches में शानदार प्रदर्शन के वजह से उन्हें National Team के लिए चुना गया |

November 2005  साथ मैचों की One Day Series में उन्हें Main Of The Series से सम्मानित किया गया इस Series में उन्होंने सबसे ज्यादा Score करने वाले Wicket Keeper का Record बनाया उन्होंने 142 गंदो में Not Out 183 Run बनाए |

इससे पहले Gilchrist का Record 172 रनो का था | September, 2007 में Twenty-Twenty World Cup Championship में वह India Team के Captain चुने गए, बस यही से धोनी ने खुद की और India Team की किस्मत बदल दी | और India यह World Cup जीत गई |

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महेन्द्र सिंह धोनी की जीवनी Interview And Life Story

धोनी भारत के उन चंद Players में से एक है जिन्होंने India Team को इतनी प्रगति दिलाई हो | 2006 में वे M.T.V Youth Icon चुने गए | वे POGO T.V Amazing Kids Award के भी Icon रहे | IPL की नीलामी में भी वह सबसे महंगे खिलाड़ी में से एक रहे | वे अपनी आक्रामक Batting और आक्रामक Captaincy के साथ-साथ अपनी Hair Style की शैली के लिए भी काफी चर्चित रहे हैं |

दुनिया भर के क्रिकेटर धोनी की तारीफ़ करते हैं, लेकिन सिर्फ एक हमारा ही देश हैं जहाँ धोनी को ज्यादातर लोग पसंद नहीं करते | जबकि धोनी जैसा कप्तान खोज पाना काफी मुश्किल है |

“Quotes – क्रिकेट के झूठे दीवानों से तो अच्छे मेरे घर के ३ कुत्ते हैं, चाहे में कोई सीरीज हारु या जीतू वह फिर भी मुझसे उतना ही प्यार करते हैं जितना की पहले करते थे  |”

में अपने आप किसी भी स्थिति में कैसे भी दबाव को हावी नहीं होने देता |

धुन का पक्का धोनी की जिंदगी के किस्से

दूध पीने के, बाल कटवाने के, मोटरसाइकिल घुमाने के ढेरों दिन इन रांची के पन्नों पर लिखे हैं. जवाहर विद्या मंदिर की टीम का सच्चा किस्सा उससे बनता था, उसे पता है कि क्रिकेट की जो धून उसे आज का धोनी बना सकी है वह वक्त के साथ-साथ और नए और मिट्टी होती जाएगी.

रांची के बच्चे गलियों में उसके घूमने के दिनों को और आज के दिनों को खुदसे उत्सुकता से मिला कर देखते हैं. व्यक्तित्व के स्तर पर एक सितारा छवि उसने बना ली है. वह हमारा लाडला है, पहाड़ी रहा होगा कभी उसका परिवार लेकिन माही तो झारखंड का है.

उसके एक बुजुर्ग प्रशंसक कहते हैं – एकाग्रता, खुलापन, विनम्रता और कसे हुए बदन का सहयोग धोनी को आधुनिक मीडिया और ब्रांड बाजार का स्टाइलिश चेहरा बनाते हैं. जब भी विज्ञापन की शूटिंग शिफ्टों और क्रिकेट के बीच चुराए क्षणों में तो बिलकुल भी बदले नहीं थे. दोस्त, रिश्तेदार, सबके बिछे वही माहि, वही बातें.

dhoni with his friends

आपने पहला क्रिकेट मैच कब देखा था ?

यह तो याद नहीं, लेकिन इतना अवश्य कह सकता हूं की घर के करीब मेकन स्टेडियम है, और उसी मैदान में मैने पहला मैच देखा था. किन-किन टीमों में मैच खेला गया था, यह याद नहीं रहा.

क्या यह जरुरी था की आप क्रिकेट को ही अपना करियर बनाते ?

मेने एन्जॉयमेंट के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया. बाद में क्रिकेट में मेरे लिए सब कुछ अच्छा होता गया. इसलिए क्रिकेट को ही मैने अपना कॅरियर बनाया.

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बैट बौल थामने का कब मौका मिला ? तब आपके हालत कैसे थे ? आपपके सामने कौन थे ?

School cricket जब मैंने स्कुल में क्रिकेट खेलना शुरू किया तो मुझे स्कुल के कोच ने सालभर बेटिंग नहीं दी थी. हमारे स्कुल डीएवी जवाहर विद्या मंदिर की टीम अच्छी थी. मुझे वर्षभर सिर्फ विकेटकीपर की भूमिका निभानी पड़ी. एक दिन मैंने अपने स्कुल के खेल शिक्षक केआर बनर्जी से पूछा की सर, मुझे बैटिंग करनी हैं. मुझे बेटिंग कब मिलेगी.

तब जाकर एक वर्ष बाद जब हमारी टीम रांची जिला स्कुल क्रिकेट लीग खेलने उतरी तो मुझे पहली बार बैटिंग का मौका मिला. चूंकि स्कूली लीग अधिकांशत 20 से 25 ओवरों के होते हैं, और मेरी भूमिका टीम में विकेट रक्षक की थी तो मुझे 7 या 8 नंबर पर ही बल्लेबाजी के लिए भेजा जाता था.

MSD batting – जब में बल्लेबाजी के लिए जाता था, तो उस समय चंद ओवर ही बचे रहते थे इसलिए में चाहता था की अधिक से अधिक stokes खेलूं और रन बनाऊ. यह याद नहीं की जब में मैच में पहली बार बेटिंग के लिए स्कुल लीग में उतरा तो कौन गेंदबाज़ मेरे सामने था यह याद नहीं.

धोनी – सफलता का रहस्य हैं एकाग्रता

परिवार में जब आपने यह फैसला सुनाया की अब क्रिकेट ही आपकी जिंदगी होगी तब भविष्य और वर्तमान को लेकर आपके मन में क्या उहपोह चल रही थी ?

इस खेल के लिए मुझे आपने परिवार से शुरु से ही प्रोत्साहन मिला. मेने शुरु में कभी नहीं सोचा था की क्रिकेटर बनूंगा भविष्य एवं वर्तमान को लेकर में कतई चिंतित नहीं था. क्योंकि में जनता हूँ की जिस भी क्षेत्र में आपको जाना है उसके लिए आपको तन मन से मेहनत करनी होगी आपको अगर अपनी क्षमता पर विश्वाश हैं और आप अपनी क्षमता को विकसित करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे तो निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी, और मेरे साथ बिलकुल यही हुआ.

मान लो की प्रथम श्रेणी क्रिकेट में आपको मौका नहीं मिलता तब आपकी दिशा क्या होती ?

निश्चित तौर पर में भी अपनी पढाई पर ज्यादा ध्यान देता और अपनी मंजिल को पाने की कोशिश करता इस खेल में मेरे साथ सब कुछ अच्छा होता चला गया क्योंकि मुझे अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा था.

धोनी और खेल

क्रिकेट में खेल की राजनीती हैं. विज्ञापनों का पैसा हैं और जबरदस्त ग्लैमर हैं. ये तीनो चीजें आप एक साथ कैसे संतुलित कर पाते हैं ?

क्रिकेट में खेल की राजनीती से मुझे कोई सरोकार नहीं हैं. में इस पचड़े में कभी नहीं पड़ना चाहता. यह सही हैं की इस खेल में विज्ञापनों में पैसा हैं और जबरदस्त ग्लैमर हैं. शुरू-शुरू में मुझे भी काफी परेशानी होती थी. में एक सीधा साधा लड़का हूँ, में भी चाहता हूँ की में भी आम लोगों की तरह सड़कों पर घुमु अपने दोस्तों के साथ एन्जॉय करू.

लेकिन ग्लैमर एवं लोक प्रियता के कारण आम जीवन में ऐसा नहीं हो पाता हैं. इसके लिए मैंने टीम के साथी खिलाडियों से सीखा. कैसे भी इनके साथ तालमेल करते हैं अभी भी मुझे साथी खिलाडियों से रोज कुछ न कुछ सिखने को मिलता ही रहता हैं.

क्या हर पिच पर आपका मिजाज बदलता हैं ?

यह तो स्वाभाविक हैं अगर विकेट बल्लेबाजी के अनुकूल हैं, तो आपका भी मन करेगा की आप भी इस पिच पर अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं.

फूल अच्छे लगते हैं ? ईश्वर से कोई बात होती हैं ? दोस्तों से क्या सो प्रतिशत बातें शेयर कर सकते हैं ?

फूल किसे अच्छे नहीं लगते हैं, मुझे भी अच्छे लगते हैं. ईश्वर में मेरी भी आस्था हैं लेकिन उनसे बात करने की कभी कोशिश नहीं की. जहां तक अपने जीवन की बातों को दोस्तों के साथ शेयर करने की बात हैं तो सो प्रतिशत तो नहीं लेकिन अधिकांश बाते शेयर करता हूँ.

वह कौन व्यक्ति हैं जिससे आप सो प्रतिशत बाते शेयर कर सकते हैं ?

बड़ी बहन जयंती गुप्ता और बहनोई गौतम गुप्ता.

एक सुखद क्षण की परिकल्पना आपकी कैसी हैं ?

पुरे परिवार के साथ मिलकर कहीं ऐसी जगह पर छुट्टियां बिताना जहां आप हर प्रकार से चिंता मुक्त हो.

आपके बालों की स्टाइल रांची के ही एक स्टाइलिस्ट ने ही सेट किया हैं. क्या आपने इसमें कोई सुझाउ दिया हैं ?

ऐसी कोई बात नहीं हैं, जब मेरा जुन्नुन हुआ तब मुझे अपने बाल मुड़वाने पड़े थे. बालों से मुझे काफी लगाव रहा हैं. इसलिए मेने कई महीनो तक बाल नहीं कटवाए. मेरे बाल जब काफी बढ़ गए तो में ब्यूटी पार्लर गया था वह भी सिर्फ अपने बाल सेट करवाने के लिए. मेने hair styler को ऐसा कोई सुझाउ नहीं दिया था.

जब कोई व्यक्ति सेलेब्रटी बन जाता हैं, तो उसकी नैतिकताए मूल्य पूरी समाझ के लिए आदर्श होने लगते हैं. क्या आप सोचते हैं की आपके मन में आदर्श की परिकल्पना हो सकती हैं ?

यह सही हैं की सेलिब्रिटी बन जाने से उसकी नेतिकताए भी बदलती हैं. और पुरे समाझ में वह आदर्श होने लगते हैं. लेकिन इसके लिए उस सेलिब्रिटी को उसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती हैं. उसकी आजादी छीन जाती हैं. इस सब के बावजूद अगर उस सेलिब्रिटी के आने से सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन हो सकते हैं तो सेलिब्रिटी को इसमें जरूर बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए.

dhoni ke bachpan ki photo

जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण turning point क्या था ?

आप इसे मेरे स्कुल लीग रिकॉर्ड को भी कह सकते हैं. साल 1994 – 95 में रांची जिला स्कुल लीग क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मैच में अपने स्कुल की और से अपने खेल कैरियर का पहला दोहरा शतक जमाना. धोनी ने 25-25 ओवर के उस मैच में झारखंड की रणजी टीम के वर्तमान खिलाडी शब्बीर हुसैन के साथ पहले विकेट के लिए 377 रनों की साझेदारी की थी.

जिसमे धोनी ने सिर्फ 128 गेंदों पर 213 अविजित रन बनाये थे. शब्बीर ने भी 101 अविजित रन बनाये थे. दूसरा turning point – आप केन्या में खेली गई त्रिकोणीय एक दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत की और से लगातार दो मैचों में दो शतक लगाने को कह सके हैं. क्योंकि उसके बाद ही मेरा चयन पहली बार भारतीय टीम में बांग्लादेश दौरे के लिए किया गया था.

क्या कोई अन्धविश्वाश आपके मन में हैं ? जैसे कुछ लोग सिर्फ 15 नंबर की जर्सी पहनना चाहेंगे ?

नहीं मेरे मन में कोई अन्धविश्वाश नहीं हैं, लेकिन चूंकि मेरा जन्म वर्ष के सातवे महीने की सात तारीख को है, और क्रकेट के मैदान में भी मुझे अधिकतर सातवे या आठवे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका मिलता हैं, इसलिए मुझे यह नंबर पसंद हैं. यही कारण हैं की में क्रिकेट के मैदान में सात नंबर की जर्सी पहनता हूँ.

फिल्म देखते हैं ? गीत सुनते हैं ? कौन सी पंक्ति दिल को छुने वाली लगती हैं.

Action movie देखता हूँ. चाहे व हिंदी फिल्म हो या फिर अंग्रेजी. धीमी आवाज में गीत सुनता हूं. किशोर कुमार एवं लता मंगेशकर ने जितने भी गाने गाए हैं, सभी गाने दिल को छुने वाले हैं. किसी एक गाने की पंक्तियां इनमे ढूंढना काफी मुश्किल हैं.

हाल में आपकी मुलाक़ात फिल्म जगत के शहंशाह अमिताभ बच्चन से हुई. उनके साथ मिलकर आपको कैसा लगा ?

ऐतिहासिक मेरे जीवन का सपना था की में अमिताभ बच्चन से एक बार मिलूं और मेरा वह सपना पूरा हो गया.

एक महीने की छुट्टी मिल जाए तो पहला काम क्या करेंगे ?

अपने परिवार के साथ अधिक से अधिक समय गुजारना चाहूंगा

जिस तरह की नई दुनिया बन रही है, उसमे नौजवान अपने भविष्य की रणनीति क्या बना सकते हैं ?

सबसे पहले उन्हें अपना strong point तलाशना चाहिए. उसके बाद उसी strong point को और मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए. इससे उन्हें उस strong point में निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी. अगर कोई खेल के क्षत्र में अपना कैरियर बनाना चाहता हैं, तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए की क्या खेल में आगे बढ़ सकता हैं, अगर हां तो फिर पूरी एकाग्रता से अपने खेल की और ध्यान देना चाहिए.

वक्त को मुट्ठी में कैसे किया जा सकता हैं ?

वक्त को आप भृम में तो डाल नहीं सकते, मुट्ठी में करना किसी के लिए भी मुश्किल हैं.

गिलक्रिस्ट मेरे आदर्श हैं 

विकेट के पीछे ऊर्जा से ओतप्रोत लम्बे छक्के मारने वाले और विकेटों के बिच चीते की तरह दौड़ने वाले इस बल्लेबाज पर इन दिनों एक साथ बहुत सारे ब्रांडेड बरस पड़ें हैं. धोनी आगे कहते हैं – मेरा रोले मॉडल ऑस्ट्रेलिया के adam gilchrist हैं. मुझे उनका ऐटिटूड पसंद हैं. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी भी.

वे शानदार विकेटकीपर भी हैं उनके खेल ने मेरे क्रिकेटीय जिंदगी को बदल दिया. उनमे अपने कैरियर का टर्निंग पॉइंट मानता हूं. ऑस्ट्रेलिया की टीम के adam gilchrist को अपना आदर्श बताते हुऐ धोनी कहते हैं की वह पिच पर एकाग्रता को अपनी रन निति मानते हैं.

क्रिकेट में दिमागीय रन निति और ऐटिटूड महत्वपूर्ण हैं. आखिर आप मैच के दौरान किसी को भी प्रभावित तो नहीं करने दे सकते हैं. एकाग्रता ही सब कुछ हैं. में किसी गेंदबाज को खुद को गाली तो नहीं देने दे सकता. इससे अपना खेल प्रभावित भी नहीं होने दे सकता.

इस दुनिया में आगे रहने के लिए आपको अपना खेल सुधारना होता हैं. मुझे लगता हैं की मुझे अपनी कीपिंग सुधारनी हैं. वह कहते हैं, मुझे याद हैं जब केन्या के खिलाफ भारत के लिए शृंखला थी तो में पहली बार टीम में आया था.

भारत में विकेटकीपर के स्थान के लिए कड़ी स्पर्धा रही हैं. और खासकर गिलक्रिस्ट द्वारा विकेटकीपर की परिभाषा बदलने के बाद वे याद करते हैं. धोनी अपने क्रिकेटीय कैरियर के बार में चर्चा करते हुई कहते हैं. में जानता था की टीम में बने रहने के लिए मुझे क्या करना हैं. मुझे बल्लेबाजी और अच्छी विकेटकीपिंग करनी थी.

Mahendra Singh Dhoni Life Story Biography

जब मेने पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन बनाये तो मुझे पता चल गया की मेने यह कर लिया हैं. बांग्लादेश में अपने कैरियर के सबसे पहले मैच में, पहली ही गेंद पर आउट हो गया था. लेकिन पांचवे मैच में, मेरी पहचान बनी जो मैंने विशाखा पटनम में पाकिस्तान के खिलाफ खेला.

इस मैच में तीसरे नंबर पर खेलने आया था. और मेने 123 गेंदों पर दुहाधार 148 रन बनाये थे. उस पारी ने मेरा कैरियर जमा दिया. मेने 15 चोक और 4 छक्के लगाकर पहला main of the match पुरुस्कार जीता. तब पहाड़ के एक लड़के के लिए सबसे मुश्किल पैदा की तेज गर्मी ने.

वहां बहुत गर्मी और उमस थी. इसके बाद मेने श्रीलंका के खिलाफ 183 रन बनाकर किसी विकेटकीपर के सर्वोच्च का स्कोर रिकॉर्ड तोडा. वह मैच जयपुर में खेला गया था. उस पारी ने तो मेरी लोकप्रियता को सातवे आसमान पर पहुंचा दिया. पहली गेंद खेलते ही में जान गया था की किसी को मिलने वाला यह सबसे अच्छा विकेट हैं. वह मेरी सबसे अच्छी पारी थी. पाकिस्तान के खिलाफ बनाये 148 रन से भी बेहतर.

माहि की जीवन गाथा जीवनी

माही के नाम से लोकप्रिय धोनी को अपनी झारखंड की जड़ों पर गर्व हैं. छोटे शहर से निकलकर इस मुकाम पर पहुंचने के अपने सफर को लेकर वह कहते हैं. में शहरी देहाती परिवेश में पला बड़ा हूँ. जिसकी वजह से मुझ पर परंपरागत का गहरा प्रभाव हैं. सच हैं की क्रिकेट की दुनिया में छोटे शहरों के नायक अधिक नहीं चल पाते हैं. हालांकि मुझे लगता हैं की हम महा नगरों के खिलाडियों से ज्यादा मजबूत हैं.

रांची में जहां में पला बड़ा केवल एक टर्फ विकेट था. वहां कोई अकादमी नहीं थी. कोई बड़ा कोच नहीं था, और अच्छी GYM नहीं थी. इसलिए हम खुद मेहनत करके सख्त बन गए. में बचपन से ही खिलाडी बनना चाहता था. 12वी क्लास मैंने सिर्फ वही याद करके पास की जो परीक्षा से पहली रात को मेरी बहन ने पढ़कर सुनाया था.

युवाओ के लिए धोनी कहते हैं- जो मुझे अपना आदर्श मानते हैं. और मुझ जैसा बनना चाहते हैं. उन सब के लिए मेरी एक ही सलाह हैं. कभी हार मत मानो और अपनी रन निति इस तरह बनाओ की कभी पछतावा न करना पड़े.

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