BAWASIR KA ILAJ 100 UPAY – PILES TREATMENT IN HINDI

बादी व खुनी बवासीर का इलाज करने से पहले रोगी के कब्ज को नष्ट करना जरुरी हैं. जब तक कब्ज को नष्ट नहीं किया जाता, तब तक बवासीर का मुकम्मल इलाज नहीं हो पाता. अब हम आपको बिना अन्य बात किये piles permanent treatment in Hindi के बारे में बताते हैं. दोनों तरह के खुनी व बादी पाइल्स बवासीर के मस्से का इलाज के लिए नुस्खे.

Khooni Badi Bawasir Ka Ilaj Ke Ramban Gharelu Upay

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खुनी बवासीर – शुद्ध स्फटिक चूर्ण 500 मि.ग्रा सुबह व शाम दही की मलाई के साथ सेवन करने से धारा प्रवाह यानी बवासीर में खून बहना बंद हो जाता हैं, इससे खुनी बवासीर का इलाज बहुत अच्छे से हो जाता हैं.

सूखे अंजीर 2-4 नग शाम को पानी भिगोकर सुबह के समय रोगी को खिला दें और सुबह के समय पानी में भिगोकर शाम के समय खिलाये. इस तरह 11 दिन इस प्रयोग को करने से खुनी बवासीर में लाभ होता हैं.

इसके साथ ही अंजीर, कालिदाख, हरड़ और मिसरी इन सभी को सामान मात्रा में लेकर तथा कूट पीसकर सुपारी के आकर की गोलियां बना लें और 1-1 गोली सुबह के समय सेवन करे. यह भी खुनी बवासीर में परम गुणकारी हैं. बेहतरीन खुनी बवासीर के घरेलु नुस्खे जो की किसी भी अचूक दवा से कम नहीं हैं.

जब बवासीर में मलावरोध और दर्द ज्यादा होने लगे तो अमलतास का गुदा 10 ग्राम, हरड़ का छिलका 6 ग्राम तथा बीज निकाला हुआ मुनक्का 10 ग्राम, इन सभी को एकत्र करके मिलाकर आधा लीटर पानी में अष्टमांश क्वाथ बनाकर सेवन करने से मलबद्धता दूर हो जाती है, वेदना शांत होती हैं तथा मस्से मुलायम होकर सिकुड़ जाते हैं. इसका लगातार 3-4 दिन तक प्रयोग जारी रखे.

सुबह के समय ग्वारपाठे का एक ताज़ा पत्ता चाकू से काटें. उसे काटने पर उसमें से जोपित वर्ण का रस निकलता हैं. उसे एक कांच के पात्र में एकत्रित इकट्ठा करे तथा उसी में उस पत्ते का गुदा 20 ग्राम तक निकालकर मिला दें तथा उसी में हल्दी का बारीक चूर्ण 1 से 2 ग्राम तक और मिसरी का चूर्ण 20 ग्राम मिलाये. इसके बाद रोगी को सेवन करा दें. इस प्रयोग को रोजाना लगातार 10 से 12 दिन तक करें. बवासीर में लाभ होने के अतिरिक्त शक्ति व उत्साह की वृद्धि होती हैं तथा जिन रोगियों का शरीर रक्तार्श के कारण पाण्डु वर्ण हो गया हो तो तथा निर्बलता अधिक हो गई हो, वह भी दूर होती हैं.

ग्वार के पत्तों का अर्क सुबह शाम 25-25 मि.ली की मात्रा में से सेवन करने से खुनी व बादी बवासीर में लाभ होता हैं. नोट : गर्मी की ऋतू में मिसरी के अनुपात से, वर्षा ऋतू में कालीमिर्च से तथा जाड़े की ऋतू में फीका ही सेवन करना चाहिए यह एक आसान सा बवासीर का इलाज बाबा रामदेव द्वारा बताया गया हैं.

हरताल 25 ग्राम और उत्तम क्वालिटी का कत्था 50 ग्राम इन दोनों को पृथक-पृथक खूब बारीक पीस छानकर एक ही में मिला लें. उसके बाद 70 ग्राम मक्खन 100 बार पानी में घोटकर (उपरोक्त पाउडर में मिलाकर) फिर से खरल में पीस लें यानी खरल कर लें. फिर इसको किसी सुरक्षित पात्र में रख कर सुरक्षित रख लें. कुछ दिनों तक लगातार इस प्रयोग को करने से मस्से ख़त्म हो जाते हैं. नोट : अगर तेल कुछ उष्ण कर लिया जाये तो विशेष व अधिक लाभकर रहता हैं.

40 किलो पानी में सज्जी व चुना मिटटी 1-1 किलो लेकर मिटटी की नाद में डाल दें और 6-7 दिन तक उसे ऐसा ही पड़ा रहने दें. 7 दिनों के बाद ऊपर का स्वच्छ पानी लोहे की कहाड़ी में डालकर जलाये. जब जल 5 किलो शेष रह जाए तब उसमें आधा किलो लहसुन का रस डालें तथा उसके बाद पानी को फिर से गर्म करें.

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बवासीर के प्रकार

जब पानी जलकर मात्र 300 ग्राम शेष रह जाए तब उतारकर तथा शीतल होने पर त्वचा पर लगाकर रखें. अगर त्वचा जल जाए तो समझे की क्षार पूर्णरूपेण तैयार हो गया हैं, अन्यथा नहीं. 160 ग्राम तिल के तेल में 10 ग्राम क्षार मिलाकर सुरक्षित रख लें. यह बवासीर नाशक सूचीवद्ध इंजेक्शन तैयार हो गया. रोगी के बवासीर को विसंक्रमित कर आर्षोयंत्र की सहायता से अर्श मस्से को पकड़कर सिरिंग में औषधि भरकर उपरोक्त दवा इंजेक्शन प्रविष्ट कर दें. इस प्रयोग से मस्से गल जायेंगे. यह परम गुणकर व सफल प्रयोग हैं.

रोजाना सुबह के समय निहार मुंह 250 ग्राम अमरुद खाने से कब्ज टूटता हैं साथ ही बवासीर में भी लाभ होता हैं. यह घरेलु उपाय उन लोगो के लिए तो और भी लाभप्रद हैं जिनको बवासीर रोग में कब्ज हैं, अगर किसी को बवासीर में कब्ज का इलाज करना हो तो वह इस नुस्खे को जरूर आजमाए.

अच्छे पके हुए अमरुद में छेद करके, उसमें अजवाइन का चूर्ण 2 से 6 ग्राम तक भरकर छिद्र को अमरुद के उसी टुकड़े से बंद करके ऊपर कपड़मिट्टी कर आग की भूभल में दाल दें तथा खूब अच्छी तरह पक जाने पर उस गोले को आंगन में (ओस में) रख दें और फिर अगली सुबह ऊपर की मिटटी आदि को भली प्रकार साफ़ स्वच्छ करके रोगी को खिलाये. यह प्रयोग निरंतर 4-6 दिन करने से अर्श रोग में लाभ हो जाता हैं.

कालीमिर्च और जीरा 10-10 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बनाये, उसमें 2 चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर दिन में 3 बराबर मात्राएँ बनाकर सेवन करने से 15 दिन में बवासीर में लाभ दिखाई देने लगता हैं. यह हैं खुनी व बादी बवासीर का तुरंत इलाज.

अमरबेल का स्वरस 50 ग्राम में, कालीमिर्च 5 नग का चूर्ण मिलाकर खूब घोटकर रोजाना सुबह के समय सेवन करने से सिर्फ 3 दिन में खुनी बवासीर और बादी बवासीर का इलाज हो जाता हैं. बहुत फर्क दिखने को मिलता हैं. यह बवासीर का तुरंत अचूक इलाज हैं.

अपामार्ग के सूखे पत्र को पीस छानकर घृतकुमारी के रस में घोटकर चने के आकर की गोलियां बनाकर व सुखाकर सुरक्षित रखे लें. ऐसा लगातार 40 दिन तक 1-1 गोली सुबह के समय पानी के साथ सेवन करते रहने से अर्श बवासीर में विशेष लाभ होता हैं.

आक के दूध में हल्दी के चूर्ण को 7 बार भिगो-भिगोकर सूखा लें. इसके बाद आक के दूध के द्वारा ही उसकी लम्बी-लम्बी गोलियां बनाकर छाया में सुखाकर सुरक्षित रख लें. इसके बाद शाम को शौच आदि करने के बाद 1 गोली अपने थूक से अथवा पानी में घिसकर मस्सों पर लेप करने से बवासीर के मस्से सूखने लगते हैं. बवासीर के मस्से सूखने का उपाय नुस्खा).

थोड़ी सी फिटकरी और थोड़ी सी हरड़ पीसी हुई दोनों को मक्खन में मिलाकर गुदा पर लगाना बहुत फायदेमंद होता हैं, यह भी बवासीर में मस्से पर लेप के लिए अच्छा घरेलु उपाय हैं.

मस्से पर लेप के लिए – सहजन के पत्तों को पीसकर बवासीर पाइल्स के मस्सों पर लेप करने से दर्द और मस्सों में काफी सुधार होता हैं.

बवासीर मस्सों में लगाने की दवा – अशुद्ध भांग के 50 ग्राम पत्ते लेकर थोड़े से पानी में इतना पकाये की पत्ते जल जाए. इसके बाद उसमें 1 ग्राम अफीम मिलाकर खूब घोटकर गोघृत मिलाकर मरहम सा बनाकर सुरक्षित रख लें. इसे अर्श बवासीर के मस्सों पर लगाने से बवासीर का दर्द व सूजन दूर होकर नष्ट हो जाते हैं. यह खुनी बवासीर व बादी बवासीर के लिए मरहम हैं.

बादी बवासीर का घरेलु इलाज – अगर किसी रोगी को बादी बवासीर हैं तो उसे बादी बवासीर के मस्सों पर नीम का तेल लगाना चाहिए, इससे बादी बवासीर का उपचार होता हैं, लाभ होता हैं.

बादी खुनी बवासीर का घरेलु इलाज बाबा रामदेव

नीला थोथा, सफ़ेद कत्था और बड़ी सुपारी इन तीनो को सामान मात्रा में लेकर नीला थोथा सुपारी को अग्नि पर भून लें इस मरहम को शौच यानी पेट साफ़ करने के बाद गुदा द्वार में लगाना चाहिए. इससे रामबाण उपाय से सिर्फ 2 सप्ताह में मस्से सुख जाते हैं. खुनी व बाड़ी बवासीर का रामबाण इलाज के लिए घरेलु नुस्खे.

100 ग्राम शुश नीम की निबोली को 50 ग्राम तिल के तेल में तलकर निबोलियों को पीस लें तथा शेष तेल में 6 ग्राम मोम मिलाकर गर्म कर के उसमें वह निबौली का चूर्ण और 1 ग्राम नीला शोथा का फूला मिलाकर मरहम बनाकर दिन में २-३ बार लगाने से बवासीर के मस्से का इलाज हो जाता हैं. यह बवासीर के मस्से का मरहम हैं.

यह खुनी व बादी बवासीर का मरहम हैं – नीम के बीजों की गिरी, माजूफल, रसोत और बिजन सार का गोंड इन सभी को 10-10 ग्राम की मात्रा में ले और मुर्दा संग, सेलखड़ी, अफीम और कपूर को 3-3 ग्राम की मात्रा में ले. अब इन सभी को खरल कर 100 ग्राम वैसलीन में मिलाकर मरहम बना लें. इसे शौच करने के बाद दिन में 2-3 बार गुदा अर्श में लगते रहने से बवासीर की खुजली, बवासीर में खून बहना, दर्द व शोथ आदि ठीक हो जाते हैं. यह बवासीर के लिए मरहम बहुत ही उपयोगी हैं, किसी भी अचूक दवा से कम नहीं हैं.

नीम की गिरी 20 ग्राम, फिटकरी का फुल 2 ग्राम और सोना गेरू 3 ग्राम लेकर तथा एकत्र करके, खूब घोटकर मलहम जैसा न बने तो उसमें थोड़ा घी अथवा मक्खन मिलाकर अथवा नारियल का तेल मिलाकर घटना चाहिए. इसे लगाने से मस्सों की पीड़ा तत्काल दूर हो जाती हैं, बवासीर का खून बंद हो जाता हैं. साथ ही मस्से मुरझा भी जाते हैं.

10 ग्राम नीम की निबौली की गुठली की गिरी पीसकर, उसमें 10 ग्राम मूली का रस मिलाकर 2 मात्राए बनाकर सुबह व शाम दोनों समय पर सेवन करें.

250 ग्राम बकरी के दूध में 1 चम्मच मेथी के बीज पीसकर औटाये तदुपरांत दूध को ठंडा कर सेवन करें. रक्तार्श खून बवासीर में बहुत ही असरकारी होता हैं.

थूहर के दूध में हल्दी मिलाकर, उसमें धागे को भिगोकर व सुखाकर (यह भिगोने व सूखने की प्रक्रिया ७ बार की जाती हैं) यह धागा किसी योग्य चिकित्सक द्वारा रोगी के अर्श मस्सों में बांधा जाता हैं. यह धागा मस्सों को काटता हैं. (बवासीर के मस्से का इलाज, मस्सों को कटाने का उपाय).

अगर मस्से बाहर दिखाई दे रहे हैं तो थूहर के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर 1-2 बून्द मस्सों पर लगा देने से मस्से काटकर गिर जाते हैं. यह मस्सों का रामबाण इलाज हैं, इसे आप बवासीर की अचूक दवा भी कह सकते हैं जो की उपयोग में सरल हैं.

बेलपत्र, अजवाइन, नागकेशर, श्वेत चन्दन, धनिया, धाय के फूल, छोटी इलाइची, कूड़ा की छल, खास व वंशलोचन इन सभी को औषधियों को सामान भाग में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें. इसे 2 से 3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम मधु के साथ लेकर ऊपर से दूध पिए. रक्तार्श खुनी बवासीर bloody piles का बहुत उपयोगी प्रयोग हैं. यह आयुर्वेदिक घरेलु उपाय में से बेहतरीन हैं.

कालीमिर्च 10 ग्राम, पीपल 20 ग्राम सोंठ 30 ग्राम, चित्रक 40 और जिमीकंद 60 ग्राम इन सभी का चूर्ण बनाकर इसमें 150 ग्राम मिसरी पीसकर मिलकर सुरक्षित स्थान पर रख लें. फिर रोजाना ३-३ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम पानी के साथ इस बवासीर के नुस्खे का सेवन करे, शीघ्र ही बवासीर का घरेलु इलाज हो जाएगा.

बवासीर के घरेलु नुस्खे

कालीमिर्च और सोंठ 3-3 ग्राम, पीपल 2 ग्राम, चित्रक 4 ग्राम और जमीकंद 6 ग्राम, इन सभी को लेकर तथा कूट पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें 25 ग्राम गुड़ मिलाकर जंगली बेर के सामान गोलियां बनाकर रख लें और 1-1 गोली सुबह शाम दूध या पानी के साथ सेवन अवश्य करे.

नारियल की जटा की छाल (कवच सहित) की भस्म करके महीन चूर्ण कर लें. इसे 10-10 ग्राम की मात्रा में रोजाना (5 दिन तक) फांककर ऊपर से 200 ग्राम अथवा इच्छानुसार गौ-तक्र पिने से खुनी बवासीर व बादी बवासीर दोनों तरह के बवासीर में बहुत लाभ होता हैं.

भांग के पत्ते 50 ग्राम और कालीमिर्च 6 ग्राम इन दोनों को खूब महीन पीसकर छोटे बेर के आकर की गोलियां बनाकर छाया में सुखाकर सुरक्षित रख लें. 1-2 गोली सुबह व शाम पानी के साथ सेवन करने वातज अर्श में शीघ्र लाभ होता हैं.

कासिम को तवे पर भूनकर और पीसकर छानकर शीशी में सुरक्षित रख लें. इसके 1-1 ग्राम की मात्रा में शीतल जल के साथ सुबह शाम सेवन करने से 1-2 सप्ताह में ही खुनी बवासीर और बादी बवासीर में लाभ होता हैं. यह बेहतरीन खुनी व बादी बवासीर के घरेलु नुस्खे में से एक हैं.

बावली घास (बाबली बूंटी) के 10 ग्राम पंचांग को 11 (नग) कालीमिर्च के साथ घोटकर 100 ग्राम पानी में छानकर लगातार 40 दिन तक सेवन करने से बवासीर, पित्तर्श व काफर्श सभी नष्ट हो जाते हैं. विशेष : बबली घास रक्तरोधक दिव्य महौषधि है. यह मक्का के खेतों में अधिकता से पाई जाती है. पूस माह के महीने तक यह हरी व ताज़ा प्राप्त हो सकती हैं. जब तक यह बूंटी तजि मिले तब तक उसी का व्यवहार करना चाहिए. जब ताजी न मिले तब सुखाकर रखी हुई बूंटी का इस्तेमाल करना चाहिए. शुष्क बूंटी की मात्रा 3-4 ग्राम हैं.

काले तिल लेकर उन्हें धोये, फिर छाया में आधे सूखा लें. तवे पर घी डालकर उन्हें मंदाग्नि से भून लें. इसके बाद उतारकर ठंडा कर लें और सामान मात्रा में बुरा मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में दूध से सुबह व शाम को सेवन करने से बवासीर में बहुत लाभ होता हैं.

सेंधा नमक, सत्यानाशी मूल, (हरी) और पवाड़ के बीज इन सभी को 1-1 ग्राम लेकर मत्थे में पीस छानकर लगातार 40 दिन तक सेवन करने से मस्से सुख कर गिर जाते हैं. यह खुनी & बादी बवासीर का घरेलु नुस्खा बहुत ही गुणकारी हैं.

कूड़ा की छाल, गोपी चन्दन, रसौत और नागकेशर इन सभी को बराबर की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर तथा छानकर रोजाना 8 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से बवासीर रोग का इलाज होता हैं, विशेष लाभ होता हैं.

प्याज के महीन-महीन टुकड़े करके धुप में सूखा लें. सूखे टुकड़ों में से 10 ग्राम तेल और 20 ग्राम मिसरी मिलाकर नित्य सेवन करने से बवासीर रोग मिट जाता हैं.

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रीठे के छिलके को तवे पर जलाकर पीस लें, फिर उसके बराबर पापारिया कत्था मिलाकर खरल करके रखें. इसमें से 1 रत्ती दवा मलाई या मक्खन में मिलाकर सेवन करने से 14 दिन में बवासीर रोग ख़त्म हो जाता हैं.

लहसुन, सज्जी, हींग, निबौली की गिरी इन सभी को 20-20 ग्राम की मात्रा में लें और गुड़ 80 ग्राम इन सभी को एक में मिलाकर 10-10 ग्राम की गोलियां बनाकर सुरक्षित रख लें और सुबह शाम 1-1 गोली सेवन करें.

4-6 अथवा अधिक मूली के कंद में से ऊपर का सफ़ेद रेशा तथा पत्तों को अलग कर, शेष कंद को कूटकर निकालकर इस रस में 6 ग्राम घी मिलाकर रोजाना सुबह के समय सेवन करने से खुनी व बादी बवासीर का इलाज हो जाता हैं.

कचूर का महीन चूर्ण 6-6 ग्राम की मात्रा में नित्य सुबह शाम पानी से 14 दिन सेवन करने से अर्श रोग में बहुत लाभ होता हैं.

पका केला लेकर उसके ऊपर का छिलका उतार लें और उसके 5-7 टुकड़े कर लें. इसके बाद फिटकरी और गेरू 6-6 ग्राम (पीस छानकर) उस पर बुरक दें और रात्रि को ओस में रख दें तथा सुबह के समय रोगी को खिला दें. इस तरह ये प्रयोग 21 दिन करने से बवासीर रोग नष्ट हो जाता हैं.

हींग (भीनी हुई), सज्जीक्षार, लहसुन की कली और नीम की निबौली, इन सभी को सामान मात्रा में लेकर उसमें चौगुनी मात्रा में पुराण गुड़ मिलाकर 2-2 गोली की मात्रा में सुबह व शाम के समय सेवन करने से पुराना बवासीर का इलाज भी हो जाता हैं.

त्रिफला चूर्ण में 1/5 भाग नीम की पत्तियों का चूर्ण मिला लें. इसमें 1 चम्मच चूर्ण सुबह निहार मुंह सेवन करना हितकर हैं.

बवासीर के मस्सों पर कासीसादि तेल लगाना भी परम गुणकारी होता हैं, यह भी बवासीर के मस्सों के इलाज में रामबाण नुस्खा हैं.

अपामार्ग के पत्ते 6 ग्राम और कालीमिर्च 5 नग लेकर पानी के साथ पीसकर व छानकर सेवन करने से अर्श यानी बवासीर में बहुत लाभ होता हैं.

छिलके रहित शुष्क नीम की निबौली को कूट पीसकर महीन चूर्ण करके सुरक्षित रख लें. इस 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह के समय बासी पानी के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता हैं.

आक के दूध की 1 बून्द जरा सी रुई पर डालकर और उस पर थोड़ा सा यवक्षार का चूर्ण बुरककर उसे 1 बताशे में रख कर निगल जाए. इस प्रयोग को 3 दिन करने से बवासीर नष्ट हो जाता हैं.

निबौली की गिरी, अलुआ, रसौत, प्रत्येक को समान मात्रा में लेकर तथा खरल कर झड़बेरी के आकर की गोलियां बना लें तथा 1-1 गोली रोजाना सुबह के समय 3 दिन तक करने से बवासीर रोग नष्ट हो जाता हैं.

नीम के बीज की गिरी का तेल 2 से 5 बून्द तक शक्कर के साथ सेवन करने से अथवा कैप्सूल में भरकर निगलने से थोड़े ही दिनों में खुनी व बादी बवासीर में लाभ हो जाता हैं.

आम की 8-10 कलियां पीसकर उसमें थोड़ी सी शक्कर मिलाकर लगभग 2 चम्मच की मात्रा में यह चटनी रोजाना खाये, बवासीर रोग में बहुत लाभ होगा.

कुकरोंदा और गेंदे के पत्ते 6-6 ग्राम तथा काली मिर्च ३ ग्राम इनको 100 मि.ली पानी में पीस छानकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता हैं.

रोजाना भोजन करने के बाद पिप्पली चूर्ण 4 रत्ती, भुना हुआ जीरा 1 ग्राम तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मत्थे के साथ सेवन करने से बवासीर रोग में बहुत लाभ होता हैं.

करेले का रस अथवा करेले के पत्तों का रस निकाल लें, उसके 20 ग्राम रस में 10 ग्राम मिसरी मिलाकर 7 दिन तक सेवन करने से रक्तज अर्श यानी खुनी बवासीर का खात्मा होता हैं.

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  • मीठे अनार के छिलकों को छाया में सुखाकर व पीसकर चूर्ण बना लें. 2-2 ग्राम की मात्रा में इसे दिन में 3 बार प्रयोग करे.
  • आम की गुठली की गिरी का चूर्ण 100 ग्राम तैयार करके रख लें. फिर रोजाना 3 बार 1-1 चम्मच 5 ग्राम चूर्ण मत्थे के साथ लें.
  • अर्श कुठार रस 250 मि.ग्राम. दिन में 3 बार छाछ के साथ प्रयोग करे.
  • करेले का रस 10 मि.ग्राम. में 5 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करें.
  • अभ्यारिष्टि 20 मि.ली में सामान भाग पानी मिलाकर दिन में 2 बार भोजन करने के बाद सेवन करें.
  • प्याज का रस 10 मि.ली में 5 ग्राम मिसरी का चूर्ण मिलाकर प्रात: काल सेवन करने से बवासीर का इलाज होता हैं.
  • एक चुटकी त्रिफला चूर्ण शहद के साथ सेवन करना भी हितकर होता हैं.
  • सुबह के समय खाली पेट 2 चम्मच मूली के रस में नमक डालकर सेवन करें.
  • गुदा पर दिखाई देने वाले मस्सों पर पपीता की जड़ पानी में घिसकर लगाना भी बहुत फायदेमंद होती हैं.
  • गाजर का रस व पालक का रस 1-1 कप भर निरंतर 8-10 दिनों तक सेवन करने से बवासीर में बहुत लाभ होता हैं.

बवासीर में परहेज (Piles Diet in Hindi)

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अब पढ़िए पाइल्स बवासीर में क्या परहेज करना चाहिए, क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. खुनी बवासीर के मुकम्मल इलाज के लिए रोगी को खाने पिने में परहेज रखना जरुरी हैं, क्योंकि तेल मिर्च और गर्म मसलों से बानी चीजे जल्दी-जल्दी कब्ज करके बवासीर को पैदा करती हैं. इनके खाने से मस्सों में अधिक सूजन होती हैं. शराब पिने से बवासीर के मरीज को बहुत नुकसान होता हैं. चाय, कॉफी और सिगरेट बीड़ी भी बिमारी को बढातीहैं. इनसे परहेज करना बहुत ही जरुरी हैं.

रोगी को ऊंट घोड़े की सवारी भी नहीं करना चाहिए. स्कूटर या बस में भी लम्बी यात्रा नहीं करना चाहिए. रोगी को खूब पानी पीना छाइये. मांस मछली, लाल मिर्च, बेंगन फ़ास्ट फ़ूड, खट्टी चीजों से परहेज रखना चाहिए. धुप में घूमने फिरने से भी रोगी को बचना चाहिए.

रोगी को सुबह उठकर बाद में घूमने जाना चाहिए. ओस पड़ी घास पर नंगे पाँव चलने से भी बहुत लाभ होता हैं. इसके साथ ही रोगी को जल्दी हजम, यानी जल्दी पचने वाली चीजे जैसे दलीय, खिचड़ी, मट्ठा, कुलफा, ककड़ी, घीया, टोरी और मूंग की दाल का सेवन करना चाहिए.

बवासीर में क्या खाये और क्या नहीं खाना चाहिए

इस रोग में रोगी को बिलकुल हल्का और ऐसा आहार लेना चाहिए जो की पचाने में ज्यादा समय न लगता हो, जैसे दलिया, हरी सब्जियां, मूंग दाल, दाल चावल, खिंचड़ी आदि ऐसे आहार जो की जल्दी से पच जाते हो. बवासीर में परहेज मांस, अंडे, भरी भोजन, दारु आदि इन सभी को बवासीर में परहेज रखना चाहिए. और बवासीर में यह खाना खाना चाहिए – दलिया, दाल चावल, खिचड़ी, फलों का रस, जितना कम हो सके उतना कम मिर्च मसलों का उपयग करे आदि. बवासीर में सिर्फ साधा आहार ही लेना चाहिए.

बवासीर के लिए योग

बवासीर रोग में योग भी बहुत उपयोगी हैं, लेकिन सिर्फ तब जब आप बवासीर के गंभीर रोगी न बन गए हो. यानी अगर आप पहले से ही बवासीर के रोगी हैं तो ऐसी स्थिति में आप बवासीर के योग नहीं कर पाएंगे. यानी योगासन करने से शरीर पर जो खिंचाव होगा वह आपको और दर्द देगा इसलिए अगर आप बवासीर के शुरूआती रोगी हैं, यानी आपको अभी कुछ दिनों या महीनो पहले ही बवासीर हो हैं, और वह अभी गंभीर हालत में नहीं हैं तो आप योगासन कर सकते हैं.

आप यह योगासन रोजाना सुबह के समय करे. यानी सुबह जल्दी उठकर थोड़ा हवा में टहलने जाए, प्राणायाम करे और बाद साफ़ स्वच्छ जगह पर या अपने घर पर आकर यह योगासन करे. याद रखे जितना नियमित जीवन आप जियेंगे उतनी ही जल्दी बवासीर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

  • शीर्षासन (Headstand pose)
  • सर्वांगासन (Shoulder Stand/Candle Pose)
  • पवनमुक्तासन (Wind Releasing Pose)
  • ताड़ासन (Palm Tree Pose)
  • मत्स्यासन (Fish Pose)
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम
  • कमजोरी ज्यादा हो तो श्वसन भी करे (Shavasana)
  • Ashwini Mudra
  • Mulabandha
  • अश्विनीन मुद्रा भी बनाये

अश्विनी मुद्रा मस्से के रोगियों के लिए बहुत ही लाभप्रद हैं, यह करने में भी बहुत आसान हैं. इसे आप कभी भी किसी भी समय कर सकते हैं. जब हमे पेशाब या तेज शौच आ रहा होता हैं तो हम उसे रोकने के लिए गुदा की मांसपेशियों को खींचते हैं ऊपर की तरफ, इस तरह गुदा की मांसपेशियों को सिकोड़ने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते हैं.

आप इस अभी कर के देख सकते हैं, कैसी भी स्थिति हो खड़े हो या बैठे हो, बस अपने मलद्वार को ऊपर की और खींचे. बस एक वक्त इस मुद्रा को नहीं करना चाहिए, और वह हैं जब आपने ठीक से पेट साफ़ नहीं किया हो. यानी सुबह मल त्याग न किया हो. इसलिए जरुरी हैं की आपको शौच के आने जैसा महसूस न हो रहा हो और ऐसा लग रहा हो की मेरा पेट साफ़ हैं तो आप इस मुद्रा को कभी कर सकते हैं.

मूल बंधा करे

मूल बंधा भी ठीक अश्विनी मुद्रा की तरह ही हैं, बस इसमें गुदा द्वार के साथ साथ लिंग की मांसपेशियों को भी खींचना होता हैं, यानी अंदर की और सिकोड़ना होता हैं. जब हमे पेशाब तेजी से आती हैं तो हम उस पेशाब को रोकने के लिए लिंग की मांसपेशियों को अंदर की और सिकोड़ लेते हैं, ठीक इसी को मूलबंध कहते हैं. इसको करने से कई लाभ होते हैं, जैसे सम्भोग की शक्ति बढ़ना, बवासीर में लाभ, शारीरिक कमजोर दूर करने में, बुद्धि बढ़ने में आदि इसके कई लाभ होते हैं.

बवासीर के मस्से का इलाज करने के लिए टोटका 

तम्बाकू और भांग 50-50 ग्राम लेकर, पीसकर 7 पुड़िया बना लें और 1-1 पुड़िया प्रतिदिन कोयलों की आग पर डालकर रोगी की गुदा में धुनि दें और धुए से मस्सो को सेंके. इस तरह लगातार 7 दिन ये प्रयोग करने से बवासीर के मस्से स्वयं ही मुरझाकर गिर जाते हैं. यह बवासीर का टोटका हैं, जो की बवासीर की देसी दवा या देसी इलाज से कम नहीं हैं.

यह बवासीर का मास्सा का उपचार की पूरी जानकारी सुदीप गुप्ता जी द्वारा बताई गई हैं, उन्होंने यह जानकारी ईमेल के माध्यम से हमे भेजी थी. अगर आप भी किसी क्षेत्र में अनुभवी हैं तो आप भी कोई लेख लिख कर हमे भेज सकते हैं.

तो दोस्तों क्या आपको (मस्से मस्सों) badi खुनी बवासीर का इलाज के आयुर्वेदिक उपाय के बारे में पढ़कर कैसा लगा, हमने यहाँ पर जो भी बवासीर का जड़ से उपचार के लिए रामबाण घरेलु उपाय थे वह सभी बता दिए हैं. अगर आप बवासीर के मस्से के बारे में व उनके लक्षण कारण के बारे में जानना चाहते हैं तो पिछले लेख पड़ें piles treatment in Hindi at Home ayurvedic remedies मस्से ख़तम करने का इलाज पाइल्स.

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