प्रेम और सदभावना का त्यौहार होली | Happy Holi 2016, Celebration Of Holi

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Essay on Holi in Hindi – होली निबंध

holi essay in hindi

प्रेम और सदभावना का त्यौहार होली

Holi,होली का संबध किसी एक जाति या संप्रदाय के साथ नहीं है। होली का त्यौहार प्रेम और सदभावना का त्यौहार है। पारस्परिक स्नेह और दोस्ती  का प्रतिक है, होली का त्यौहार। गांव के लोग इस दिन गेहूं और चने की कटाई शुरू करते है। किसान अपनी मेहनत को सफल होता देखकर खुशियों से झूम उठते है।

Why Do We Celebrate Holi

होली पर्व की पौराणिक रूप में देखें तो होलीका से भी जोडा जाता है। प्रहलाद के पिता राजा हरयणकश्यप अपने को भगवान मानता था। लेकिन उसका बेटा प्रहलाद ऐसा मानने को तैयार नही था और वह अपने पिता के आतंकों के प्रति झुकने को भी तैयार नहीं था।

हरयणकश्यप की बहन होलीका को वरदान था कि आग उसको जला नहीं सकती इसलिए हरयणकश्यप ने अपनी बहन को से कहा की वह प्रहलाद को गोदी में लेकर आगे में बैठ जाये। उसने वैसा ही किया पर हुआ उल्टा ही, होलीका जल गई, प्रहलाद सुरक्षित रहा।

और इसलिए इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतिक कहा है । भाईचारा पारस्परिक स्नेह और सदभावना का पर्व दूसरे की भलाई में ख़ुशी देने में ही हमें सच्चा आनन्द मिलता है।

खासकर यह पर्व एक-दूसरे के मस्तक पर चुटकी भर सिर्फ गुलाल लगाकर और मिठाई खिलाकर मनाया जाता रहा है। पर अब समाज में विकृति आ गयी है।

आज मात्र लकडीयों और कचरे को इकठ्ठा करके उसे होली रूप दहन करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है। उसे देखकर सभी समझदार व्यक्तियों का सिर शर्म से झुक जाता है। वह या तो घर में छिप जाता हैं या किसी अज्ञात स्थान पर चला जाता है। पर इसकी रोकथाम के लिए हर एक व्यक्ति को भीतर से जागना चाहिए ।

हम उन विकृतियों को भस्मसात करने के लिए आगे आऐं। जिनके कारण परिवार, समाज, राष्ट्र की संस्कृति धुमील हो रही है। जाति, संप्रदाय, धर्मगुरू, भाषा, प्रांत आदि के नाम पर संघर्ष करना , आपस में खुन-खराबा करना, राष्ट्र की सपंति को हानी पहूंचाना ठीक नही है। होली भाईचारा बडाने का पर्व हे।

इस दिन शराब पीना और एक-दूसरे पर कीचड फेंकना, मूंह काला करना आदि गंदे कार्य करके खुशियां मनाना हमारी विकृति का सूचक है। अध्यात्म के रूप से होली का भी बड़ा महत्व माना जाता है |

** इस होली पापों को भस्मसात कर जीवन में नया अध्याय शुरू करें। **
एक कवि की यह चार पंक्तियाँ

अब तक गफलत में जो खोया सो खोया,
अब तक उसर में जो बोया सो बोया,
अब भी जीवन में ज्योति जगाओ भाई,
अब भी अंतर का तमस भगाओ भाई |

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