संविधान देश और हम – Constitution of India

Constitution of India in hindi

संविधान देश और हम

किसी भी स्वतंत्र देश (independent country) का अभिमान proudly उसका अपना संविधान constitution होता है। संपूर्ण गणराज्य की शक्ति संविधान constitution में निहित होती है।

देश सवंधिान की विभिन्न धाराओं के साथ आगे बढता है। 15 अगस्त 1947 को भारत India आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत में अपना संविधान लागू किया ।

भारत का संविधान विभिन्न प्रकार की विशेषताओं को अपने में समेटे हुए है। हमारी संविधान की सबसे प्रमुख विशेषता हैं- धर्मनिरपेक्षता, जिसके कारण हमारे देश में भिन्न-भिन्न धर्म, संस्कृति, उत्सव, रितीरीवाज की झलक दिखाई देती है, जो हमें विभिन्नता में भी एकता का बोध कराती है। संपूर्ण विश्व हमारी इस विशेषताओ को आश्चर्यचकित दृष्टि से देखता है।

दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र जो जाति, भाषा, धर्म, क्षेत्र आदि दृष्टि से तो भिन्न हैं किंतू राष्ट्रहित के लिए संपूर्ण गणराज्य अपनी भिन्नताओं को त्याग कर एक हो जाता है।

सचमुच यह विषय आष्चर्यचकित कर देने वाला है। और इस सभी का श्रेय जाता है- भारत के नागरिकों को।
हम भिन्न-भिन्न होते हुए भी देश हित के लिए एक हो क्योंकि एकता ही विकास का मूलमंत्र है।

हम अपनी व्यस्तता से हटकर स्वहित को किनारे कर केवल और केवल अपनी जन्मभूमि अपने प्रिय देश और इस देश के रहवासीयों के लिए चिंतन करें कि किस प्रकार हम अपने कार्यों से अपने देश का हित कर सकते है।

  • केवल आरोप लगाने और दुसरों को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कार्य तभी पूर्ण होगा जब आप पूर्ण निष्टा से कार्य करेंगे।
  • हम सब स्वयं से एक प्रश्न करें कि मैंने देश के लिए क्या किया ? या मैं देश के लिए क्या कर सकता हूं ?
  • आज वह समय हैं जब हमें बहुत कुछ करने की जरुरत है।
  • यदि हम देश के लिए चिंतन करते हैं तो हममे से कितने हैं जिसे हमारे देश की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और विदेष नीति की जानकारी है ?

हमारे देश की आज विश्व में कैसी छवि हो रही है? क्या हमने कभी इस विषय पर चिंतन किया हैं ? हम, सबमें और मेरा को छोडकर देश हित के लिए चिंतन और कार्य करें और यह संकल्प लें कि हमारा हर कार्य देश हित के लिए ही होगा। देश प्रेम दर्शाने के लिए सिमाओं पर जाकर शहीद होना जरूरी नहीं है।

आवष्यकता हैं तो बस एक संकल्प की । हम सब यह संकल्प करें कि इस भारत भूमि को पुनः जगसिरमौर बनाकर विष्व का पथप्रदर्षन करने का स्वप्न देखेंगे। मेरे मित्रों गंभीरता से इस विषय पर विचार किजिए क्योंकि सपने ही विचार बनते है। और विचार ही कर्म के रूप में हमारे सामने आते है। इसी शुभ संकल्प के साथ जय हिन्द, जय भारत!

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