अपनी आदतों को अपने ऊपर शासन न करने दें – Rule Your Habits

आपके पूर्वज उन नियमों से मुक्त होने के लिए यहां आये थे जो व्यक्ति की अंतरात्मा के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता को समाप्त करते थे। स्वतंत्र जन्में अमेरिकन यह नहीं चाहते कि कोई उनको आदेश दे। तब आपकी अपनी आदतों के द्वारा स्वयं को क्यों आदेशित होने देना चाहते हो ?

जैसे जब आप खाना नहीं चाहते और फिर भी आप खा लेते है, अथवा जब आप दूसरों के साथ लडना नहीं चाहते फिर भी लडते है। इसका क्या कारण है ? आपने स्वयं को बुरी आदतों को दास बना लिया है।

अमेरिकी में या किसी और लोकतांत्रिक देश में पैदा हो जाने मात्र से हदय और मन की स्तंत्रता का आश्वासन नहीं मिल जाता। स्वंतत्र होने का अर्थ है व्यक्ति के अपने आत्मज्ञान के आदेशानुसार उचित कार्य करने में समर्थ होना।

न कि आदतो के अनुसार अंधाधुंध अनुसरण करना। अथवा तर्कहीन भय के वाश मेे होकर कार्य करना। ज्ञान सच्ची स्वतंत्रता को प्रदान करता है और यही अमेरिका की वास्तविक चेतना है।

जो आपकों अच्छा लगा वही कार्य करना स्वतंत्रता नहीं है। यह स्वतंत्रता का दुरपयोग है। मान लें आप एक घर में बीस अन्य लोगों के साथ रहते हैं जिनमें से प्रत्येक यह मानता हैं कि स्वतंत्रता जो आपको अच्छा लगे वह करने का अधिकार हैं और उनमें से प्रत्येंक वह कार्य करना चाहते हैं जो दूसरों की इच्छाओ का विराधी है ? ऐसी परिस्थितियों में वास्तविक स्वंत्रतत्रा नहीं हो सकती। स्वतंत्रता केवल स्वशासन के नियमों का अुनसरण करने से आती है।

स्वतत्रं रूप से वह कार्य करना जिसे आपको करना चाहिए और जब आपको करना चाहिए अपने विवेक द्वारा मार्गदर्षित होना केवल यही वास्तविक स्वतंत्रता है। आदतों की दास्तान सबसे बूरी दास्तान है।

स्वतत्रं होने का प्रण करेै, इस प्रतिज्ञापन से अपनी आत्मा की स्वतंत्रता की दिव्य स्मृति को जागृत करें। अगर चपन से मुझमें कुछ बूरी आदते रही है, मैं उन्हें अपने ज्ञान और इछशक्ति के प्रयोग से दूर कर सकता हूं मैं अपने शरीर रूपी ग्रह का स्वामी हूं। इसलिए आप भी अपने स्वामी बनिए – वही करें जो की ठीक हो, वह न करें जो की मन कहे — त्रिलोकचंद छाबड़ा

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