सबसे मुश्किल काम – 5 Best All Time Akbar Birbal Short Stories

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Akbar Birbal Short Story in Hindi

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Story – 1 सबसे मुश्किल काम 

एक दिन Birbal दरबार में देर से पहुँचे। Akbar ने पूछा क्या बात है ? बीरबल आज देर से क्यों आये? बीरबल ने कहा- जहांपनाह, आज मुझे बच्चों को संभालना पडा।

बादशाह को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ, बोले यह भी कोई काम हुआ? जहांपनाह बच्चों को संभालने का काम सबसे कठिन है। जब यह काम सिर पर आ पडता है तो कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता।

बादशाह बाले- बीरबल बच्चों को बहलाना तो सबसे आसान काम है, उनके हाथ में कोई खाने की चीज दे दो, या कोई खिलोना थमा दो बस काम बन गया। 

बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत आपको इसका अनुभव नहीं है इसलिए आपको यह काम आसान लगता है। जब आप यह साफ-साफ़ अनुभव करेंगे तो आपको मेरी बात समझ में आ जायेगी। चलिए मैं छोटे बच्चे का अभिनय करता हूं और आप मुझे बहला कर देखिए।

बादशाह तुरन्त राजी हो गये।  बीरबल छोटे बच्चे की तरह रोने लगे। अब्बा मुझे दुध चाहिए, बादशाह ने फोरन दुध मंगवा लिया । दुध पीने के बाद बीरबल ने कहा अब मुझे गन्ना चुसना है। Tales of akbar birbal 

बादशाह ने गन्ना मंगवाया और उसके छोटे-छोटे टुकडे करवा लिये, मगर बीरबल ने उसे छुआ तक नहीं वह रोता ही रहा।

रोते-रोते वह बोला अब्बा मुझे पूरा गन्न चाहिए। बीरबल का रोना जारी रहा। बादशाह ने हारकर दुसरा गन्ना मंगवाया। मगर बच्चा बने बीरबल रोते-रोते बोले यह गन्ना मुझे नहीं चाहिए, मुझे तो पहले वाला ही पूरा गन्ना चाहिए। in hindi

यह सुनकर बादशाह झल्ला उठे, उन्होनें कहा बकवास मत कर चुपचाप चुस ले। कटा हुआ गन्ना अब पुरा कैसे हो सकता है ?  

[ही मैं तो पहले वाला गन्ना हीे लूंगा। बादशाह यह सुनकर क्रोधित हो उठे। अरे है कोई यहां ? इस बच्चे को यहां से ले जाओ। बीरबल हंस पडे। बादशाह को स्वीकार करना पडा कि बच्चों को संभालना वास्तव में बहुत मुष्किल काम है।

Story. 2

भक्तों के कृष्णा

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- तुम्हारे धर्म ग्रंथो में यह लिखा हैं कि हाथी की गुहार सुनकर श्रीकृष्ण जी पैदल दौडे थे। न तो उन्होंने किसी सेवक को ही साथ लिया न सवारी पर ही गये।

इसकी वजह समझ में नही आती, क्या उनके यहां सेवक नही थे ? बीरबल बोले – इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहांपनाह।

कुछ दिन बीतने पर बीरबल ने एक नौकर को जो शहजादे को इधर-उधर टहलाता था, एक मोम की बनी हुई मूर्ति दी जो कि हुबहु बादशाह के पोते की तरह थी। मूर्ति यथोचित दहने कपडों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने पर बिलकुल शहज़ादे जैसी मालूम होती थी।

बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है । जिस तरह तुम नित्य प्रति बादशाह के पोते को लेकर उनके सम्मुख जाते हो उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना। और बाग में जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पडना।

तुम सावधानी से जमीन पर गिरना, लेकिन मूर्ति पानी में जरूर गिरनी चाहिए। यदि तुम्हें इस कार्य में सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जायेगां।

उस दिन बादशाह बाग में बैठे थे वही एक जलाशय था नौकर शहजादे को खिाला रहा था। कि अचानक उसका पैर फिसला और उसके हाथ से शहजाद छिटक कर पानी मे जा गिरा।

बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गये और उठकर जलाशय की तरफ लपके। कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिये पानी से बाहर निकले बीरबल भी उस वक्त वहां उपस्थित थे और बोले –

जहापनाहं! आपके पास सेवकों और कनीजों की फैाज है फिर आप स्वयं वह भी नंगे पांव अपने पोते के लिए क्यों दौड पडे ? आखिर सेवक सेविका किस काम आयेंगी ? बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे, वे समझ नही पा रहे थे कि बीरबल कहना क्या चाहते हैं।

बीरबल ने कुछ देर रूक कर फिर कहा अब भी आप नही समझे तो सुनिये जैसे आपको अपना पेाता प्यारा है। उसी तरह श्रीकृष्ण जी को अपने भक्त प्यारे है। इसलिए उनी पुकार पर ही वे दौडे चले गये थे। यह सुनकर बादषाह को अपनी भूल का एहसास हुआ।

Story. 3

दाडि में आग और चापलूसी

बादशाह अकबर की यह आदत थी की वह अपने दरबारीयों से तरह-तरह के प्रष्न किया करते थे। एक दिन बादषाह ने दरबारीयों से प्रश्न किया, अगर इस दरबार में सभी दाडी वाले हो और सबकी दाडी में आग लग जाये जिसमें मैं भी शामिल हूं तो आप किसकी दाडी पहले बुझााऐंगे ?

हुजूर की दाडी की। बादशाह आपकी,सभी लोग एक साथ बोल पडे। बादशाह को लगा, जैसे सब झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने बीरबल से पूछा, बताओं किसकी दाडी की आग सबसे पहले बुझाओगे ?

हुजूर सबसे पहले मैं अपनी दाडी की आग बुझाउंगा, फिर किसी और की दाडी की ओर देखूंगा। बीरबल ने उत्तर दिया।
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले, मुझे खुश करने के उद्देष्य से आप सब झुठ बोल रहे थे। सच बात तो यह हैं कि हर आदमी सबसे पहले अपने बारे में सोचता है। चापलुसी की हद है। अगर आप चापलुसी करना छोड दे. तो बीरबल जैसे हो जायेंगे।

Story. 4

चोर की दाढी मे तिनका

एक बार अकबर को बीरबल की चतुराई परखने की इच्छा हुई। उन्होंने अपनी उंगली से अंगुठी उतारकर अपने एक दरबारी को सौंप दी और उससे कहा इस अंगुठी को तुम अपने पास छिपाकर रख लो। इसके विषय में किसी से कुछ मत कहना। आज हम बीरबल को थोडा परेशान करना चाहते है।

थोडी देर बाद जैसे ही बीरबल दरबार में आये अकबर ने कहा – बीरबल आज सुबह मेरी अंगुठी खो गई वह अंगूठी मुझे बेहद प्रिय है। इसलिए तुम किसी भी तरह तलाश करके लाओ।

बीरबल ने अकबर से कहीं बार अलग-अलग ढंग से पूछा कि अंगुठी कहां गिरी , कहां रखी थी पर बादशाह अकबर एक ही बात कहते रहे कि मुझे कुछ याद नहीं। बस तुम मेरी अंगुठी खोज कर ला दो।

बीरबल समझ गये कि बादशाह उसे मुर्ख बना रहे है। उन्होंने दरबारीयों की तरफ देखा, सभी दरबारी मुस्कुरा रहे थे। अब तो उन्हें पक्का यकीन हो गया कि उन्हें मूर्ख बनाया जा रहा है। वे बोले ठीक हैं मैं अभी आपकी अंगूठी खोज देता हूं।

बीरबल आंख बंद करके कोई मंत्र सा बढ-बढाने लगे। फिर उन्होंने अकबर से कहा – हूजूर आपकी अंगुठी यहीं हैं वह किसी दरबारी के पास है। जिसके पास हैं उसकी दाढी मे तिनका है।

जिसके पास अंगुठी थी वह दरबारी चोंक पढा और उसने फौरन अपनी दाडी पर हाथ फैरा उस समय बीरबल की चोकन्नी नजर चारों ओर घुम रही थी । बीरबल फौरन उस दरबारी के पास पहुंचे और उसका हाथ पकड कर बोले- जहांपनाह आपकी अंगुठी इन साहब के पास है। birbal akbar kahaniyan

मेरी गुजारिष हैं कि इनकी तलाशी ली जाये। अकबर को तो यह मालूम था ही कि अंगुठी खोजने के लिए बीरबल ने कौन सी युक्ति आजमाई थी यह तो बादशाह को मालूम नही हुआ परन्तु बीरबल की चतुराई पर बादशाह खुश हो गये।

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3 Comments

  1. Shubham Kumawat
  2. disha
  3. Savitri

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