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Akbar Birbal Short Stories in Hindi

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1. सबसे मुश्किल काम Akbar Birbal Stories

Akbar birbal stories in Hindi Language एक दिन Birbal दरबार में देर से पहुँचे। Akbar ने पूछा क्या बात है ? बीरबल आज देर से क्यों आये? बीरबल ने कहा- जहांपनाह, आज मुझे बच्चों को संभालना पडा। बादशाह को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ, बोले यह भी कोई काम हुआ? जहांपनाह बच्चों को संभालने का काम सबसे कठिन है। जब यह काम सिर पर आ पडता है तो कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता। प्रसिद्द अकबर बीरबल की कहानियां जो की प्रेरणा के साथ-साथ शिक्षा भी देगी.

बादशाह बाले- बीरबल बच्चों को बहलाना तो सबसे आसान काम है, उनके हाथ में कोई खाने की चीज दे दो, या कोई खिलोना थमा दो बस काम बन गया।  बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत आपको इसका अनुभव नहीं है इसलिए आपको यह काम आसान लगता है। जब आप यह साफ-साफ़ अनुभव करेंगे तो आपको मेरी बात समझ में आ जायेगी। चलिए मैं छोटे बच्चे का अभिनय करता हूं और आप मुझे बहला कर देखिए।

अकबर बादशाह तुरन्त राजी हो गये बीरबल छोटे बच्चे की तरह रोने लगे। अब्बा मुझे दुध चाहिए, बादशाह ने फोरन दुध मंगवा लिया । दुध पीने के बाद बीरबल ने कहा अब मुझे गन्ना चुसना है|

बादशाह ने गन्ना मंगवाया और उसके छोटे-छोटे टुकडे करवा लिये, मगर बीरबल ने उसे छुआ तक नहीं वह रोता ही रहा। रोते-रोते वह बोला अब्बा मुझे पूरा गन्न चाहिए। बीरबल का रोना जारी रहा। बादशाह ने हारकर दुसरा गन्ना मंगवाया। मगर बच्चा बने बीरबल रोते-रोते बोले यह गन्ना मुझे नहीं चाहिए, मुझे तो पहले वाला ही पूरा गन्ना चाहिए.

यह सुनकर बादशाह झल्ला उठे उन्होनें कहा बकवास मत कर चुपचाप चुस ले। कटा हुआ गन्ना अब पुरा कैसे हो सकता है ?  नहीं मैं तो पहले वाला गन्ना हीे लूंगा। बादशाह यह सुनकर क्रोधित हो उठे। अरे है कोई यहां ? इस बच्चे को यहां से ले जाओ। बीरबल हंस पडे। बादशाह को स्वीकार करना पडा कि बच्चों को संभालना वास्तव में बहुत मुष्किल काम है।

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इन सब को पढ़ने के बाद यह भी पड़ें –

कितनी चूड़ियाँ

एक दिन अकबर ने बीरबल से कहा: “क्या आप मुझे बता सकते हैं कि तुम्हारी पत्नी कितनी चूड़ी पहनती हैं?” बीरबल ने कहा कि वह नहीं बता सकता । “तुम बता नहीं सकते?” अकबर ने कहा “तुम हर दिन उसके हाथ देखते हो जब वह खाना बनाती है। फिर भी आप नहीं जानते कि उसके हाथ में कितने चूड़ियां हैं? यह कैसे है?”

बीरबल ने कहा, “हम बगीचे में चलते हैं, महाराज,” फिर मैं आपको बताऊंगा। ” वे सीढ़ी के रास्ते नीचे चले गए जो बगीचे की ओर जाता था। फिर बीरबल ने सम्राट की ओर इशारा किया: “आप हर दिन इस सीढ़ी तक ऊपर और नीचे जाते हैं। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि सीढ़ियों में कितने कदम हैं?” सम्राट झेंप गए और जल्दी से इस विषय को बदल दिया।

सड़क को छोटा करवाना

Akbar birbal story of Road – सम्राट अकबर अपने कुछ दरबारियों के साथ एक दूर स्थान पर जा रहे थे। यह एक गर्म दिन था और सम्राट यात्रा को लेकर थका हुआ था। उन्होंने कहा, “क्या कोई इस सड़क को छोटा नहीं कर सकता?” बीरबल ने कहा, “मैं कर सकता हूं”। अन्य दरबारियों ने एक-दूसरे को देखा, उलझन के साथ। उन सभी को पता था कि पहाड़ी इलाके के माध्यम से कोई अन्य रास्ता नहीं था।

जिस सड़क पर वे यात्रा कर रहे थे वह केवल एक थी जो उन्हें अपने गंतव्य पर ले जा सकता थी । “तुम सड़क को छोटा कर सकते हैं?” सम्राट ने कहा। “ठीक है, ऐसा करो।” “मैं करूँगा,” बीरबल ने कहा। ” पहले इस कहानी को बताओ ।” और सम्राट के पालकी के साथ सवारियों को, उन्होंने एक लंबी और मनोरंजक कहानी सुनानी शुरू की जिसने अकबर को संभाला और उन सभी को, मंत्रमुग्ध किया। इससे पहले कि वे यह जानते, वे अपनी यात्रा के अंत तक पहुंच गए थे। अकबर ने कहा, “हम जल्दी ही पहुंचे हैं।” बीरबल ने कहा, “ठीक है,” आप सड़क को छोटा करवाना चाहते थे ”

बादशाह का झगड़ा

अकबर बीरबल की कहानी – बीरबल और सम्राट के बीच एक झगड़ा हुआ था और बीरबल ने महल में न घुसने का वादा किया और कहा कि वह कभी वापस नहीं आएगा। अब अकबर ने उसे याद किया और उसे वापस पाना चाहता था लेकिन कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ है। तब सम्राट के पास एक सुझाव था कि किसी भी व्यक्ति को 1000 सोने के सिक्कों का इनाम दिया जाएगा जो निम्न शर्त पूरी करके महल में आ सके।

आदमी को एक छतरी के बिना चलना था, लेकिन उसे एक ही साथ धूप और छाया में होना पड़ता था। “असंभव,” लोगों ने कहा फिर एक ग्रामीण अपने सिर पर एक खाट जो जालीदार थी लेकर आया और पुरस्कार का दावा किया। “मैं सूरज की धूप में चला हूं, लेकिन उसी समय मैं खाट के की छाया में भी था”।

यह एक शानदार समाधान था पूछताछ पर ग्रामीण ने कबूल किया कि उनके साथ रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा इस विचार का सुझाव दिया गया था। “यह केवल बीरबल हो सकता है!” सम्राट ने खुशी से कहा। बेशक, यह बीरबल था और उन्होंने और सम्राट अकबर से खुशीपूर्वक पुनर्मिलन किया।

श्रेष्टतम

सम्राट अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या किसी व्यक्ति के लिए सबसे नीचा और श्रेष्ठतम एक ही समय पर होना संभव है। बीरबल ने कहा, “यह संभव है।” सम्राट ने कहा, “तो ऐसा व्यक्ति लाओ।” बीरबल बाहर जाकर एक भिखारी के साथ लौट आया। उन्होंने कहा, “वह आपके विषयों में सबसे नीच है,” उन्होंने अकबर के सामने पेश किया। “यह सच है,” अकबर ने कहा। “लेकिन मैं नहीं देख सकता कि वह श्रेष्ठ कैसे हो सकता है।” बीरबल ने कहा, “उसने सम्राट के साथ दर्शकों को भी सम्मान दिया है।” “यह उसे भिखारी के बीच सबसे श्रेष्ठ बनाता है।”

मूंछें

एक दिन सम्राट अकबर ने एक प्रश्न के साथ अपने दरबारियों को चौंका दिया। “अगर किसी ने मेरी मूंछ को खींच लिया तो उसे किस तरह की सजा दी जानी चाहिए?” उसने पूछा। “उसे कोडे मारने चाहिए!” एक दरबारी ने कहा “उसे फांसी दी जानी चाहिए!” दूसरे ने कहा। “उसका सिर काट लिया जाना चाहिए!” एक तिहाई ने कहा। “और तुम बीरबल?”

सम्राट ने पूछा “क्या आपको लगता है कि अगर किसी ने मेरी मूंछें खींच दीं तो क्या करना सही होगा?” बीरबल ने कहा, “उन्हें मिठाई दी जानी चाहिए।” “मिठाइयाँ?” अन्य ने अचरज से पूछा । “हां”, बीरबल ने कहा। “मिठाई, क्योंकि केवल एक वह उसका पोता ही है जो अपने महामहिम के मूंछ को खींचने की हिम्मत रखता है है।” तो सम्राट ने अपनी अंगूठी एक पुरस्कार के रूप में बीरबल को दी ।

स्वर्ग की सुरंग

एक बार बीरबल से जलने वालों दरबारियों ने शाही नाई का सहारा लिया। नाई ने एक दिन अकबर से कहा, “महाराज, आप सबका ख्याल रखते हैं पर अपने पूर्वजों के बारे में कयों नहीं सोचते?” “मैं उनके लिये क्या कर सकता हूँ ?” अकबर ने पूछा। “आप उनके लिए एक चतुर आदमी भेज दिजिए, बीरबल इस काम के लिए ठीक रहेगा” अकबर को नाई की बात जँच गई. अकबर ने बीरबल को अपने पूर्वजों के पास जाने को कहा।

बीरबल ने कहा “ठीक है महाराज मैं स्वर्ग तक की सुरंग बनवा लेता हूँ ” बीरबल ने एक सुरंग बनवाई जो एक गुप्त स्थान तक जाती थी। कुछ दिनों बाद बीरबल ने स्वर्ग के लिये प्रस्थान किया। सभी जलने वाले दरबारी खुश हो गये। कुछ महिनों बाद बीरबल वापस लौटा, सभी दरबारी बीरबल को देखकर भौचक्के रह गये. अकबर ने पूछा, “बताओ बीरबल, हमारे पूर्वज कैसे हैं ?” “आपके पूर्वज अच्छे हैं, पर वहाँ कोई नाई नहीं है, आप उनके लिये शाही नाई भेज दिजिए।” बीरबल ने कहा। नाई की पोल खुल गई, उसे कारावास की सजा दी गई।

2. भक्तों के कृष्णा Stories Of Akbar Birbal

एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- तुम्हारे धर्म ग्रंथो में यह लिखा हैं कि हाथी की गुहार सुनकर श्रीकृष्ण जी पैदल दौडे थे। न तो उन्होंने किसी सेवक को ही साथ लिया न सवारी पर ही गये।

इसकी वजह समझ में नही आती, क्या उनके यहां सेवक नही थे ? बीरबल बोले – इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहांपनाह।

कुछ दिन बीतने पर बीरबल ने एक नौकर को जो शहजादे को इधर-उधर टहलाता था, एक मोम की बनी हुई मूर्ति दी जो कि हुबहु बादशाह के पोते की तरह थी। मूर्ति यथोचित दहने कपडों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने पर बिलकुल शहज़ादे जैसी मालूम होती थी।

बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है । जिस तरह तुम नित्य प्रति बादशाह के पोते को लेकर उनके सम्मुख जाते हो उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना। और बाग में जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पडना।

तुम सावधानी से जमीन पर गिरना, लेकिन मूर्ति पानी में जरूर गिरनी चाहिए। यदि तुम्हें इस कार्य में सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जायेगां।

उस दिन बादशाह बाग में बैठे थे वही एक जलाशय था नौकर शहजादे को खिाला रहा था। कि अचानक उसका पैर फिसला और उसके हाथ से शहजाद छिटक कर पानी मे जा गिरा।

बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गये और उठकर जलाशय की तरफ लपके। कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिये पानी से बाहर निकले बीरबल भी उस वक्त वहां उपस्थित थे और बोले – जहापनाहं! आपके पास सेवकों और कनीजों की फैाज है फिर आप स्वयं वह भी नंगे पांव अपने पोते के लिए क्यों दौड पडे ? आखिर सेवक सेविका किस काम आयेंगी ? बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे, वे समझ नही पा रहे थे कि बीरबल कहना क्या चाहते हैं।

बीरबल ने कुछ देर रूक कर फिर कहा अब भी आप नही समझे तो सुनिये जैसे आपको अपना पेाता प्यारा है। उसी तरह श्रीकृष्ण जी को अपने भक्त प्यारे है। इसलिए उनी पुकार पर ही वे दौडे चले गये थे। यह सुनकर बादशाह को अपनी भूल का एहसास हुआ।

3. दाडि में आग और चापलूसी

बादशाह अकबर की यह आदत थी की वह अपने दरबारीयों से तरह-तरह के प्रश्न  किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारीयों से प्रश्न किया, अगर इस दरबार में सभी दाडी वाले हो और सबकी दाडी में आग लग जाये जिसमें मैं भी शामिल हूं तो आप किसकी दाडी पहले बुझााऐंगे ?

हुजूर की दाडी की। बादशाह आपकी,सभी लोग एक साथ बोल पडे। बादशाह को लगा, जैसे सब झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने बीरबल से पूछा, बताओं किसकी दाडी की आग सबसे पहले बुझाओगे ?

हुजूर सबसे पहले मैं अपनी दाडी की आग बुझाउंगा, फिर किसी और की दाडी की ओर देखूंगा। बीरबल ने उत्तर दिया।
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले, मुझे खुश करने के उद्देष्य से आप सब झुठ बोल रहे थे। सच बात तो यह हैं कि हर आदमी सबसे पहले अपने बारे में सोचता है। चापलुसी की हद है। अगर आप चापलुसी करना छोड दे. तो बीरबल जैसे हो जायेंगे।

4. चोर की दाढी मे तिनका Hindi Story

एक बार अकबर को बीरबल की चतुराई परखने की इच्छा हुई। उन्होंने अपनी उंगली से अंगुठी उतारकर अपने एक दरबारी को सौंप दी और उससे कहा इस अंगुठी को तुम अपने पास छिपाकर रख लो। इसके विषय में किसी से कुछ मत कहना। आज हम बीरबल को थोडा परेशान करना चाहते है।

थोडी देर बाद जैसे ही बीरबल दरबार में आये अकबर ने कहा – बीरबल आज सुबह मेरी अंगुठी खो गई वह अंगूठी मुझे बेहद प्रिय है। इसलिए तुम किसी भी तरह तलाश करके लाओ।

बीरबल ने अकबर से कहीं बार अलग-अलग ढंग से पूछा कि अंगुठी कहां गिरी , कहां रखी थी पर बादशाह अकबर एक ही बात कहते रहे कि मुझे कुछ याद नहीं। बस तुम मेरी अंगुठी खोज कर ला दो।

चतुर बीरबल समझ गये कि बादशाह उसे मुर्ख बना रहे है। उन्होंने दरबारीयों की तरफ देखा, सभी दरबारी मुस्कुरा रहे थे। अब तो उन्हें पक्का यकीन हो गया कि उन्हें मूर्ख बनाया जा रहा है। वे बोले ठीक हैं मैं अभी आपकी अंगूठी खोज देता हूं।

बीरबल आंख बंद करके कोई मंत्र सा बढ-बढाने लगे। फिर उन्होंने अकबर से कहा – हूजूर आपकी अंगुठी यहीं हैं वह किसी दरबारी के पास है। जिसके पास हैं उसकी दाढी मे तिनका है। जिसके पास अंगुठी थी वह दरबारी चोंक पढा और उसने फौरन अपनी दाडी पर हाथ फैरा उस समय बीरबल की चोकन्नी नजर चारों ओर घुम रही थी । बीरबल फौरन उस दरबारी के पास पहुंचे और उसका हाथ पकड कर बोले- जहांपनाह आपकी अंगुठी इन साहब के पास है। birbal akbar stories at its best.

मेरी गुजारिष हैं कि इनकी तलाशी ली जाये। अकबर को तो यह मालूम था ही कि अंगुठी खोजने के लिए बीरबल ने कौन सी युक्ति आजमाई थी यह तो बादशाह को मालूम नही हुआ परन्तु बीरबल की चतुराई पर बादशाह खुश हो गये।

पढ़िए – इस कहानी में बीरबल अकबर को “गरीबों के लिए पैसों का कितना महत्व होता है” यह एहसास दिलाएंगे. बीरबल की मनोरंजक और शिक्षाप्रद कहानी.

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बीरबल का अपराध और क्षुद्रों का न्याय. बहुत समय पहले बीरबल ने बादशाह प्रार्थना करके यह वचन ले लिया था कि जब कभी मुझसे कोई अपराध हो जाये तो उसका न्याय वही पंच करे जिनको मैं खुद चुनूं. बादशाह ने बीरबल की यह प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें इसका वचन दे दिया था. बादशाह अपने वायदे के पक्के थे इसलिए बीरबल को प्रार्थना की स्वीकृति के बारे में सुनकर बहुत ख़ुशी हुई.

अचानक एक दिन बीरबल से एक अपराध हो गया बादशाह ने दंड देने के लिए बीरबल को बुलाया और कहा-तुमने जो कसूर किया हैं उसकी सजा तुम्हें जरूर मिलेगी तब बीरबल ने इस अवसर का लाभ उठाने के लिए बादशाह को उनके दिये गये वचन का स्मरण करवाया, बादशाह की अनुमति लेकर पांच क्षुद्रों को पंच चुना बादशाह को आश्चर्य हुआ यह क्षुद्र क्या न्याय करेंगे ?

खैर उन पांचों क्षुद्रों को बीरबल के अपराध के संबध में सारी बातें समझा दी गई और न्याय करने का आदेश दिया गया. ऐसा सम्मान पाकर क्षुद्रों को बहुत ख़ुशी हुई साथ ही उनमें प्रतिहिंसा की भावना भी जागृत हुई, पंचों ने यह सोचा कि बीरबल ने कई बार उनकों अनेक कष्टों में डाल दिया था उसका बदला लेने का यह सुनहरा अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए.

ऐसी दंड व्यवस्था की जानी चाहिए कि बीरबल को अच्छा सबक मिले ताकि भविष्य में वह किसी के साथ बूरा व्यवहार करने का साहस न करे. उन पांचों में से पहला बोला – भाईयों बीरबल का अपराध तो बहुत बडा हें इसलिए 105 रूपया जुर्माना करना चाहिए.

इतनी बडी रकम की जुर्माने की कल्पना कर के दूसरा पंच सिहर उठा उसने सोचा बीरबल के बाल-बच्चों पर इसका बूरा असर पडेगा उसका घर बार चौपट हो जायेगा यह सोचकर जुर्माना घटाकर सिर्फ 100 रुपये करने का प्रस्ताव किया.

तीसरे पंच को इतना जुर्माना भी ज्यादा लगा उसने आश्चर्य प्रकट करते हुए जुर्माना घटाकर 60 रुपये ही करने का प्रस्ताव किया साथ ही उसने यह भी कहा कि इतना जुर्माना काफी हैं फिर भी अगर पंच लोग चाहें तो 10 रुपये और बढा सकते हैं.

अब चौथे पंच की बारी आई, उसने अब तक के सभी प्रस्तावों का विरोध किया और कहा इतना जुर्माना तो बहुत ज्यादा हैं और इसमें ज्यादा से ज्यादा कमी होना चाहिए. चौथे पंच के प्रस्ताव का पांचवे ने समर्थन किया और सर्वसम्मति से थोडी देर की बहस के बाद बीरबल पर 50 रुपये जुर्माना करना चाहिए क्योंकि यह जुर्माना बहुत ज्यादा नहीं है और बादशाह से यह प्रार्थना की गई कि इसकी वसूली में सख्ती न बरती जाये. इसके बाद पांचों क्षुद्र पंच बादशाह से विदा लेकर चले गये.

बादशाह समझ गये कि बहुत सोच-समझ कर बडी होशियारी से बीरबल ने क्षुद्रों को अपना पंच चुना था, बादशाह की नजरों में 50 रुपये का जुर्माना कुछ नहीं था लेकिन क्षुद्रों की गरीबी और परिस्थिति का खयाल करके कि साल भर तक जीजान से परिश्रम करने के बाद भी वे 20-25 रुपये नहीं बचा पाते इसलिए उनकी नजर में 50 रुपये बहुत ही बडा जुर्माना हैं.

बादशाह दया की भावना से भर उठे साथ ही बीरबल की चतुराई की मन ही मन तारिफ करने लगे. बादशाह बीरबल को फैसला सुनाने ही जा रहे थे लेकिन ऐसा सोचते-सोचते उन्होंने बीरबल को दंडमुक्त कर दिया.

बीरबल को पहले ही मालूम था कि यह गरीब जातियां इतना ज्यादा रूपया नहीं बचा पाती जो ज्यादा जुर्माना निर्धारित कर सके और हुआ भी यही. Akbar birbal hindi story – इसी कारण बीरबल ने अपने न्याय के लिए क्षुद्रों को ही पंच बनाया था. इसमें उनका उद्देश्य भी था की इस तरीके से बादशाह को निम्न जातियो की गरीबी का भी अहसास हो जायें.

ख्वाजासरा नामक एक हिजडा बादशाह अकबर का काफी मूंहलगा था. वह बीरबल से काफी चिढता था इसलिए हर वक्त बीरबल की बुराई करते हुए उनके कान भरा करता था. वह बीरबल को किसी न किसी बहाने दरबार से निकलवा देने की फिराक में रहता था.

हिजडों को मरवा दिया जाये Birbal’s Wisdom Story in Hindi

एक दिन ख्वाजसरा ने बीरबल के खिलाफ बहुत सी बातें बादशाह के कानो में डालकर कहीं – जहांपनाह आपने बैकार में ही बीरबल को अपने दरबार में रखा हुआ है. वह बडा हाजिर जवाब है, बादशाह बोले और हर बात का जवाब एकदम सटीक देता है. खाक जवाब देता है.

ख्वाजसरा बुरा सा मूंह बनाकर बोला. अगर वह इतना ही हाजिर जवाब हैं तो मेरे तीन सवालों को जवाब दे दें तब जानूं. तीन सवाल ? बादशाह ने उसे आश्चर्य से देखा.. हां अलीजहां! क्या सवाल है तुम्हारें ? बादशाह ने पूछा. पहला सवाल प्रथ्वी का बीज कहां है ? तारों की संख्या क्या है ? तीसरा सवाल दुनियाभर में कितने मर्द है और बच्चे है ?

यह सुनकर बादशाह अकबर ने बीरबल को तुरन्त दरबार में बुलाया और ख्वाजसरा के तीनों सवाल उनसे किये. बीरबल ने दो-चार पांव इधर-उधर रखकर एक स्थान पर खूंटी गाडी और कहा – प्रथ्वी का बीज इस जगह पर है जो न माने वह माप लें, इसके बाद बीरबल एक भेढ को पकड लाये और उसे बादशाह के सामने खडा करके बोले – जहांपनाह इसके शरीर मे जितने बाल हैं उतने ही आकाश में तारें है ?

तीसरे सवाल का जवाब देते समय बीरबल मूस्कूराकर बोले – जहापनाह मर्द और औरतों का हिसाब इन हिजडों ने बिगाड रखा है, यह न मर्द हैं न औरत. यदि इन हिजडों को मरवा दिया जाये तो ठीक-ठीक हिसाब लग जायेगा. यह सुनते ही हिजडा ख्वाजसरा वहां से खिसक गया. बादशाह अकबर बीरबल की प्रशंसा करने लगे.

मोम का शेर – Clever Wisdom Men Birbal

पुराने समय में बादशाह एक-दुसरे की बुद्धि की परीक्षा लिया करते थे. एक बार फारस के बादशाह ने अकबर को नीचा दिखाने के लिए एक शेर बनवाया और उसे एक पिजंरे में बंद करवा दिया. इस पिंजरे को उसने एक दूत के हाथों बादशाह अकबर के पास भेजा और कहलवा दिया कि यदि उनके दरबार में कोई बुद्धिमान पुरूष होतो “इस शेर को बिना पिंजरा खोले ही बाहर निकाल दें”

साथ ही यह शर्त भी थी कि यदि इस का हल न हुआ तो फारस के बादशाह का सारे राज्य पर अधिकार हो जायेगा. अब तो बादशाह बडे चिंतित हुए सारे दरबार में उन्होंने यह प्रश्न रखा इस समय बीरबल वहां न थे कोई भी दरबारी इस प्रश्न को हल न कर सका.

बादशाह को बडी चिंता हुई कि “शान” भी मिटटी में मिल जायेगी और राज्य भी हाथ से चला जायेगा. उसी समय बीरबल आ पहूंचा बादशाह ने उनके सामने भी यह प्रश्न रखा तो बीरबल ने पहले अच्छी तरह से शेर को देखा और फिर एक गर्म लोहे की छड से उन्होंने थोडी देर में सारे शेर को पिंजरे से गायब कर दिया.

कारण यह था कि शेर मोम का था जो धातु का मालूम होता था. इस बात को बीरबल ने पहचान लिया. फारस का राजदूत बीरबल की बुद्धिमता को देखकर दंग रह गया और बादशाह भी बडे प्रसन्न हुए.

 बकरी का वजन

बीरबल की योग्यता की परीक्षा के लिए बादशाह अकबर अधिकतर उनसे प्रष्न पूछा करते थे. कभी -कभी तो अजीब तरह की हरकतें भी कर बैठते थे. एक बार बादशाह अकबर ने एक बकरी देते हुए बीरबल से कहा -बीरबल हम तुम्हें एक बकरी दे रहे हैं इसका वनज तुलवा दो यह वनज न तो घटना चाहिए न ही बढना चाहिए. जबकि इसे खुराक पूरी दी जाये.

बीरबल सोचने लगे कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने बकरी को अपने पास रख लिया, बकरी को पूरा खाना दिया जाता था, उसकी सारी सुविधा का हर तरह से ध्यान रखा जाता था. इस तरह दिन गुजरते जा रहे थे. एक महीने बाद बादशाह ने बीरबल से पूछा –
वह बकरी ठीक तो है न ?
जी हां!
वजन, जी उतना ही है.
बढा तो नहीं ? जी नहीं!
भूखी रही होगी इसलिए वजन घटा जरूर होगा.
जी नहीं!
पूरा खाना मिला है.
वैसी ही स्वस्थ है. वजन भी उतना ही है.

इतना कह-कर बीरबल ने बकरी मंगवाई. बकरी का वनज तौला गया, उसका वजन वही था जो एक महीने पहले था. बादशाह को बडा अचंभा हुआ. क्योंकि उन्होंने यह पता लगा लिया था कि बकरी को पूरी खुराक दी जा रही है.

फिर उन्होंने बीरबल से कहा – यह क्या राज हैं कि बकरी का वजन न घटा न बढा ? बीरबल बोले – कोई खास बात नहीं हैं जहापनाह सारा दिन बकरी को खिलाता-पिलाता था. रात को एक घंटे शेर के सामने खडा कर देता था, वह भय से कांपती थी और पनप ही नहीं पाती थी. बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह अकबर और अन्य दरबारी मुस्कुराये बगैर नहीं रह सके.

Hope you enjoyed – ऐसी ही मजेदार कहानियां akbar birbal short stories in Hindi पढ़ने के लिए हमसे जुड़े रहे. यहां आपको बहुत सी short stories पढ़ने को मिलेगी जो की आपको मनोरंजन के साथ-साथ प्रेरणा भी देगी. बीरबल अपने आप में अनोखे थे इसीलिए बादशाह अकबर उन्हें इतना पसंद करते थे, और इसीलिए हम भी उनके किस्से कहानी सुनना व पढ़ना पसंद करते हैं. बीरबल और अकबर की ऐसी ही कई स्टोरीज हमने यहां पोस्ट की हैं आप उन्हें भी पड़ें व हमसे जुड़े रहे ताकि रोजाना नई कहानियां पढ़ सके.

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6 Comments

  1. Shubham Kumawat
  2. disha
  3. Savitri
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  5. Sanketh
  6. Rvi

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